हिमाचल की गीता देवी पांच परिवारों के लिए मसीहा बन गईं। मंडी के धरमपुर गांव की रहने वाली गीता देवी पेड़ से गिर गईं थीं। इससे उनके सिर पर गंभीर चोटें आईं और उन्हें पीजीआई में दाखिल कराया गया। पीजीआई में इलाज के दौरान उनके दिमाग ने कोई रिस्पांस नहीं दिया। काफी प्रयास करने के बाद जब कोई हलचल नहीं हुई तो पीजीआई ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
पीजीआई के ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर ने गीता के पति व उनके बेटे से संपर्क कर आर्गन ट्रांसप्लांट की बात की तो परिजन आर्गन डोनेशन के लिए तैयार हो गए। उसके बाद पीजीआई के विशेषज्ञों ने आर्गन डोनेशन और ट्रांसप्लांट की तैयारी शुरू की। मैचिंग के दौरान पीजीआई में लिवर का मरीज नहीं मिला।
इस संबंध में पीजीआई की रोटो (रीजनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन) टीम ने नोटो (नेशनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन) दिल्ली में संपर्क किया। नोटो ने इस संबंध में सभी रीजनल रोटो को मैसेज पास किया। कुछ ही देर बाद गुजरात के अहमदाबाद के हास्पिटल आईटीएस में लिवर का मैचिंग मरीज मिल गया।
ट्रैफिक पुलिस ने बनाया ग्रीन कॉरिडोर
अहमदाबाद से मरीज मिलते ही गीता देवी के लिवर को भेजने की तैयारी शुरू हुई। ट्रैफिक पुलिस ने पीजीआई से इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया। 24 किमी की दूरी मात्र 23 मिनट में पूरी की। वहां से तीन बजकर 25 मिनट पर अहमदाबाद के लिए फ्लाइट रवाना हुई। गीता देवी का लिवर 42 वर्षीय एक व्यक्ति में ट्रांसप्लांट हुआ। इससे व्यक्ति को नया जीवन मिला है।