फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पंजाब, न्यूयॉर्क और कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने शोध के बाद किया चौंकाने वाला खुलासा

Sun, 07 Oct 2018 04:26 AM IST
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
विज्ञापन

पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू), न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी और कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अपने शोध में पाया है कि 14 लाख साल पहले भारत आए आदिमानव के पूर्वज अफ्रीकी थे। जम्मू के पास शिवालिक की पहाड़ी में सूखा पड़ने के कारण वे खत्म हो गए थे। इनकी संख्या आठ मिलियन थी। 

विज्ञापन


अब आईआईटी कानपुर यह पता लगाएगा कि 14 लाख साल पहले शिवालिक की पहाड़ी के जंगलों और उसके आसपास कैसा वातावरण था। दरअसल, वर्ष 1926 में ब्रिटिश वैज्ञानिक लेविस ने अपनी पुस्तक में बताया था कि आदिमानव के जीवाश्म शिवालिक की पहाड़ियों में मिलते हैं। इसी आधार पर पंजाब यूनिवर्सिटी के भूगर्भ विज्ञानी प्रो. राजीव पटनायक, न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक कृष गिलबर्ट और कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक वीरेंद्र पटेल जम्मू के पास ऊधमपुर और शिवालिक की पहाड़ियों तक पहुंचे। उनके साथ रिसर्च स्कॉलर शुभम, प्रेमजीत, वासिम, रोहित, दीपक भी थे। काफी दिनों तक सर्च अभियान चला। 

वैज्ञानिकों की टीम को वर्ष 2015-16 में पत्थर में मानव अवशेष और आदिमानव के दांत मिले। उसी को लेकर टीम यहां पहुंची। पत्थर से मानव अंश और दांतों को अलग किया गया। इसकी डीएनए, आईसोटोप, स्टेबन आईसोटोप आदि की जांच हुई। जांच रिपोर्ट अफ्रीका के आदिमानव से जब मिलती जुलती दिखी तो वैज्ञानिकों ने वहां के वैज्ञानिकों से संपर्क साधा और वहां की रिसर्च रिपोर्ट मांगी। जांच से पता लगा कि यहां आए आदिमानव के पूर्वज अफ्रीकी थे जो 14 लाख साल पहले सूखा पड़ने और जंगलों के खत्म होने से लुप्त हो गए थे। अब वैज्ञानिकों की टीम इसकी अगली खोज के लिए 13 अक्तूबर को शिवालिक की पहाड़ी के लिए प्रस्थान करेगी।  
विज्ञापन


‘अध्ययन में पता लगा है कि शिवालिक की पहाड़ियों में निवास करने वाले आदिमानव के पूर्वज अफ्रीकी थे। उनका खाद्य पदार्थ क्या था और उस दौरान वातावरण कैसा था, इसका पता आईआईटी कानपुर लगाएगा। इसके लिए मानव अंश के नमूने भेज दिए गए हैं।’ - प्रो. राजीव पटनायक (भूगर्भ विज्ञान विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय)

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें