शहरवासियों की कामर्शियल और आवासीय इमारतों के एरिया का सर्वे अब आसमान से होगा। जी हां सेटेलाइट और जीपीएस की मदद से इमारतों के अलावा शहर में डले सीवरेज, पानी की पाइपें, पार्कों और सड़कों का डाटा भी इकट्ठा किया जाएगा।
इस समय नगर निगम की ओर से शहरवासियों से प्रापर्टी और हाउस टैक्स लिया जा रहा है, जबकि नगर निगम के पास लोगों की इमारतों के एरिया का कोई डाटा नहीं है। ऐसे में नगर निगम पूरी तरह से सेल्फ असेसमेंट स्कीम पर डिपेंड है।
इन सभी कामों के लिए नगर निगम की ओर से ग्लोबल इंफारमेंशन सिस्टम की टेक्नोलोजी को हायर करने का प्रस्ताव तैयार किया है। जिस कंपनी की ओर से यह काम किया जाएगा उसे नगर निगम की ओर से 82 लाख रुपये का भुगतान किया जाएगा।
शहर में ऐसा पहली बार होने जा रहा है। नगर निगम के अनुसार स्मार्ट सिटी मिशन के तहत शहर के हर चीज का डाटा होना चाहिए। ऐसा होने से नगर निगम के आय के स्रोत्र भी बढ़ेंगे। प्रस्ताव के अनुसार अलग से जीआईएस सेल का गठन भी किया जाएगा।
कुल और कवर एरिया को कलकुलेट करना मुश्किल
प्रशासन ने अगस्त माह में ही शहरवासियों पर हाउस टैक्स थोपा है। 10 अक्तूबर तक शहरवासियों को 40 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। प्रशासन की ओर से कुल और कवर एरिया पर अलग अलग हाउस टैक्स के रेट तय किए गए हैं, ऐसे में लोगों का दोनों एरिया में कलकुलेट कर टैक्स अदा करने में मुश्किल आ रही है।
लेकिन सर्वे के बाद जब डाटा आ जाएगा तो नगर निगम को पता चल जाएगा कि किस मकान का कितना एरिया है और वहां पर रहने वाले का कितना हाउस और प्रापर्टी टैक्स लिया जाना चाहिए।
नहीं पता कौन सी पाइप कहां है
प्रशासन और नगर निगम के पास ऐसा कोई रिकार्ड नहीं है जिससे पता चल सके कि अंडरग्राउंड कौन सी पाइप कहां जा रही है। ऐसे में मैपिंग होने से इंजीनियरिंग विंग को भी अपने काम में काफी मदद मिलेगी। विकास का काम शुरू होने के बाद कई बार खुदाई के बाद पता चलता है कि उस जगह अंडरग्राउंड पाइपें डली हुई हैं जिससे कई बार काम की लागत भी बढ़ जाती है।
6 से 8 माह हो जाएगा डाटा इकट्ठा
इस प्रस्ताव पर अक्तूबर माह में होने वाली सदन की बैठक में मोहर लगा दी जाएगी। जबकि प्रस्ताव पास होने के छह से आठ माह के बाद शहर का सारा डाटा इकट्ठा हो जाएगा।
नगर निगम के ज्वाइंट कमिश्नर राजीव गुप्ता का कहना है कि प्रस्ताव के अनुसार शहर के निर्माणाधीन प्रापर्टी के अलावा वाटर, सीवरेज, पार्कों, सड़कों का डाटा जीआईएस टेक्नोलाजी के माध्यम से आ जाएगा।
इससे नगर निगम के इंजीनियरिंग विंग को भी काफी फायदा मिलेगा। घर घर जाकर लोगों की प्रापर्टी के एरिया को भी चेक करने की जरूरत नहीं रहेगी और जल्दी ही सारा रिकार्ड तैयार हो जाएगा।