इतिहास में पहली बार किसी एडवोकेट जनरल को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है। ऐसा हुआ है हरियाणा में। प्रदेश सरकार ने एडवोकेट जनरल बलदेव राज महाजन को कैबिनेट मंत्री का रैंक व दर्जा प्रदान किया है।
प्रदेश के इतिहास में यह पहला अवसर है जब एडवोकेट जनरल को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है। पंजाब में एडवोकेट जनरल अशोक अग्रवाल को कैबिनेट मंत्री का रैंक प्राप्त है।
पिछले साल प्रदेश में भाजपा के सत्ता में आने के बाद, बलदेव राज महाजन को नौ नवंबर को प्रदेश का सर्वोच्च लॉ अफसर नियुक्त किया गया था।
महाजन से पहले एजी पद पर हवा सिंह हुड्डा दस साल तक कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान बने रहे, लेकिन पूर्व सीएम हुड्डा ने उन्हें कैबिनेट रैंक नहीं दिया था।
लंबे समय तक आरएसएस से जुड़े रहे
गौरतलब है कि बलदेव राज महाजन लंबे समय से आरएसएस से जुड़े रहे हैं। वे अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं। हरियाणा का एडवोकेट जनरल बनने के बाद उन्होंने परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।
महाजन को हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष द्वारा वर्ष 2015-16 के लिए विधानसभा की सबार्डिनेट लेजिलेशन कमेटी का सदस्य भी बनाया गया है।
एडवोकेट जनरल नियुक्त किए जाने के बाद महाजन ने हरियाणा विधानसभा में पूरा दिन बैठकर बजट सत्र की पूरी कार्यवाही देखी, जब प्रदेश के राज्यपाल सदन में प्रदेश सरकार की नीतियों के बारे में भाषण दे रहे थे।
हालांकि, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 177 के तहत किसी राज्य का एडवोकेट जनरल प्रदेश के मंत्रियों के साथ विधानसभा की कार्यवाही में बोलने और हिस्सा लेने का अधिकार रखता है, लेकिन उसे वोट डालने का अधिकार नहीं है। करीब 20 साल बाद इस बार ऐसा हुआ है कि हरियाणा विधानसभा की कार्यवाही में एडवोकेट जनरल उपस्थित रहे।
हर तरह की सरकारी सुविधा दी जाएगी
हरियाणा सरकार की ओर से महाजन को प्रति माह ढाई लाख रुपये रिटेनरशिप के रूप में दिए जाएंगे। इसके अलावा आवासीय सुविधा या प्रति माह 50 हजार रुपये हाउस रेंट दिया जाएगा। सरकार की ओर से कार और चालक मुहैया कराए जाएंगे।
इसके साथ ही टीए/डीए, टेलिफोन, मेडिकल और एलटीसी सुविधा जो कैबिनेट मंत्री को मिलती है, दी जाएंगी। महाजन को कैबिनेट मंत्री के समकक्ष दिए जाने वाले वेतनमान एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
उन्हें राज्य सहकारी निकायों, बोर्डों, विश्वविद्यालयों, सहकारी बैंकों और वक्फ बोर्ड की मुकदमेबाजी में पर्यवेक्षक व प्रभारी भी बना दिया गया है।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में सरकार के मामलों की पैरवी करते समय उन्हें सरकार के अधिवक्ताओं के पैनल ग्रेड ए के अनुरूप निर्धारित मानदेय देय होगा।