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मोदी के मंत्री ने सीएम को सिखाया, कैसे चलाएं सत्ता?

Tue, 14 Apr 2015 07:52 AM IST
धर्मवीर निडाना/अमर उजाला, उचाना/जींद(हरियाणा)
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राजनीति में ट्रेजडी किंग के नाम से मशहूर रहे मोदी के इस मंत्री ने वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था के बहाने सीएम को भी सत्ता केंद्रित नहीं करने की सलाह दे डाली। उचाना के मंच पर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह ने तो यहां तक कह दिया कि सीएम को इतना ताकतवर क्यों बनाते हो कि चपरासी की बदली भी सीएम ही करे।
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इसके लिए उन्होंने कई जुमले भी सुनाए। सीएम की ओर इशारा करते हुए बीरेंद्र सिंह ने कहा कि गरीब लोगों के काम नहीं करना भ्रष्टाचार से भी बड़ा जुर्म है। क्यों गरीब को सीएम विंडो पर जाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि भ्रष्ट अफसरों को निलंबित करने से काम नहीं चलेगा। इसके लिए व्यवस्था बदलने की जरूरत है।

सरकार को ऐसा कुछ करना होगा कि लगे ये लोग नई सोच के साथ आए हैं। बीरेंद्र सिंह ने कहा कि विधानसभा चुनाव में भाजपा के कुछ उम्मीदवार बहुत ही कम वोटों से हारे हैं। ऐसे में पार्टी को इन स्थानों पर राजनीतिक हल ढूंढना पड़ेगा।
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उन्होंने कहा कि कुछ लोग कह रहे हैं कि सरकार में ‘स्वाद सा नहीं आरया’ इस पर उन्होंने कहा कि असल में ये अफसर स्वाद नहीं आने देते। कामों को लटकाने की अफसरों की आदत बन गई है। इसके चलते गरीब लोगों के काम नहीं हो पाते।  

बीरेंद्र सिंह ने सीएम के अनुभव पर उठाए सवाल: कार्यक्रम में सीएम के अनुभव पर सफाई देते हुए बीरेंद्र सिंह ने कहा कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी नए मुख्यमंत्री बने थे। लेकिन आते ही तीन महीने में सब कुछ कब्जे में कर लिया और सत्ता अपने हिसाब से चलाने लगे थे। हालांकि उन्होंने हुड्डा पर निशाना भी साधा।

पूर्व मुख्यमंत्री की मिमिक्री करते हुए कहा कि वे कहते थे, मैं आधा रोहतक का हूं, आधा जींद का। यदि ऐसा है तो आधा विकास जींद में क्यों नहीं किया। उन्होंने कहा कि वे ऐसा नहीं सोचते वे रोहतक में भी उतना ही विकास करेंगे, जितना जींद में और बाकी हरियाणा में। उन्होंने कहा कि क्षेत्रवाद का ही परिणाम है कि रोहतक के बाहर कांग्रेस की सीट नहीं आई।
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बीरेंद्र सिंह ने मंच से ही सीएम को दी नसीहत

सभा स्थल पर ही विस्तार अनाज मंडी सहित कई परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास किया। अपनी साफगोई के लिए चर्चित रहे बीरेंद्र सिंह ने मंच से ही सीएम को कहा कि सिर्फ पत्थर लगाने से कुछ नहीं होता। छह साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा ने भी यहां पत्थर लगाए थे, लेकिन कुछ नहीं हुआ।

भूमि अधिग्रहण पर पक्ष: इस दौरान बीरेंद्र सिंह ने केंद्र के विवादित भूमि अधिग्रहण अध्यादेश की भी जमकर वकालत की। उन्होंने कहा कि यहां आने से पहले किसान सभा के लोगों ने उन्हें ज्ञापन दिया है। जो मांगें हैं, अध्यादेश उससे कहीं अच्छा है। यदि ऐसा नहीं मिला तो वे राजनीति छोड़ देंगे। बीरेंद्र सिंह ने कहा कि वे ऐसा कोई काम नहीं करेंगे, जो किसान के हित में नहीं हो।

मेरिट पर नौकरी का विरोध: कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह और उचाना की विधायक प्रेमलता ने एक सुर में मेरिट पर नौकरी का विरोध किया। दोनों नेताओं ने कहा कि उचाना क्षेत्र में अच्छे स्कूल नहीं हैं। यहां गरीब लोग हैं बड़े स्कूलों में बच्चों को लोग नहीं भेज सकते हैं। ऐसे में ‘हमारे बच्चे’ मेरिट में कैसे आएंगे। ऐसे में विधायक प्रेमलता ने मांग की कि उचाना को नौकरियों मे आरक्षण दिया जाए।
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