पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा है कि गोद लिया गया बच्चा अनुकंपा के आधार पर नौकरी पाने का हकदार है। इसके लिए जरूरी महज यह है कि सभी आवश्यक दस्तावेजों पर गोद लेने वाले माता-पिता का ही नाम हो। हाईकोर्ट ने याची की ओर से हिंदू अडॉप्शन एंड मेंटेनेंस एक्ट 1956 की धारा 12 का हवाला दिए जाने पर गौर करते हुए पंजाब सरकार के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें कहा गया था कि अनुकंपा के आधार पर नौकरी केवल मृतक के परिवार के सदस्य को ही दी जा सकती है।
तरनतारन निवासी सुखविंदर कौर की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि उनके पति गुरचरण सिंह बीएसएफ से रिटायर हुए थे। उनके नाबालिग पुत्र करनवीर सिंह को तीन अन्य लोगों के साथ 16 फरवरी, 1991 को सीआरपीएफ के जवानों ने गलती वश आतंकी समझकर मार डाला था। इस मामले में तरनतारन के सरहाली पुलिस थाने में एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी। पंजाब सरकार ने विधवा सुखविंदर कौर के गुजारे के लिए 5000 रुपये मासिक राहत भी शुरू कर दी।
याचिका में आरोप लगाया गया कि पिता-पुत्र के अंतिम संस्कार के समय जिला प्रशासन और पंजाब के गर्वनर ने आश्वासन दिया था कि याची के परिवार के एक व्यक्ति को नौकरी दी जाएगी, लेकिन पिता-पुत्र की मौत के बाद परिवार में केवल याची विधवा ही बची थीं। इसलिए उन्होंने अपने भाई जसकरण सिंह के बेटे को गोद ले लिया, जिसका जन्म 15 जुलाई, 1991 को हुआ था। बच्चा गोद लेने के बारे में सारी प्रक्त्रिस्या 29 जनवरी, 1993 तक पूरी कर ली गई। बच्चे के सभी दस्तावेजों पर माता का नाम सुखविंदर कौर और पिता का नाम गुरचरण सिंह लिखा है।
याचिका के अनुसार, अब यह बच्चा बी. कॉम तक की पढ़ाई कर चुका है। याची ने 15 जनवरी, 2013 को तरनतारन के डीसी को पत्र लिखकर अनुकंपा के आधार पर बेटे को नौकरी दिए जाने की मांग की, जिसे डीसी ने 7 फरवरी, 2013 को रिजेक्ट कर दिया। याचिकाकर्ता इसके बाद संगत दर्शन कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री बादल से मिली, जिन्होंने याची की अपील विशेष मुख्य सचिव (आर) को और वहां से सचिव राजस्व एवं पुर्नवास तथा आपदा प्रबंधन को भेजी। वहां से तरनतारन के डीसी को सूचना मिली कि चूंकि जसकरण सिंह मृतक गुरचरण सिंह द्वारा गोद लिया पुत्र नहीं है, इसलिए उन्हें अनुकंपा के आधार पर नौकरी नहीं दी जा सकती।