चंडीगढ़। सेक्टर-34 में पिछले दो सप्ताह में दो बड़े-बड़े कमर्शियल कार्यक्रम हुए, जिसमें 60 हजार से अधिक लोग दूर-दूराज से पहुंचे। लेकिन इन कमर्शियल कार्यक्रमों के चलते एक-एक दिन के हिसाब से प्रशासन को केवल 60 हजार रुपये मिले जबकि पुलिस को सुबह से आधी रात तक ठंड में खड़ा होने के बजाय कुछ नहीं मिला। लेकिन शहर के मौजिज लोगों ने सवाल उठाया है कि जब सरकार क्रिकेट मैच के लिए बीसीसीआई से पुलिस सुरक्षा के लिए बिल भेजकर खर्चा लेती है तो इस तरह के कार्यक्रम करवाने वाले आयोजकों से भी पुलिस सिक्योरिटी देने को लेकर खर्चा वसूला जाना चाहिए।
दरअसल, बीते 7 दिसंबर को सेक्टर-34 के मेला ग्राउंड में पहले पंजाबी गायक करण औजला का लाइव कन्सर्ट कार्यक्रम आयोजित हुआ था जो कि एक निजी कंपनी द्वारा करवाया गया था। इस कार्यक्रम के लिए भी आयोजकों ने प्रशासन को मेला ग्राउंड के लिए महज 30 हजार रुपये दिए। इस कार्यक्रम में करीब 1200 पुलिस कर्मियों के अलावा करीब 500 निजी सिक्योरिटी गार्ड व बाउंसर लगाए गए थे। कार्यक्रम में करीब 25 से 30 हजार लोगों की भीड़ यहां पहुंची थी जबकि टिकटें केवल 15 हजार ही बिकी थी। ऐसे में यहां एंट्री को लेकर काफी हंगामा हुआ था और पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ गया था। इसके बाद बीते शनिवार 14 दिसंबर को फिर से उसी मेला ग्राउंड में पंजाबी गायक दिलजीत दोसांझ का कार्यक्रम आयोजित किया गया। लेकिन इस बार यहां सुरक्षा व इंतजामों के लिए पुलिस के तीन हजार से अधिक जवानों को तैनात किया गया था। इन दोनों कार्यक्रमों में लगाए गए निजी सिक्योरिटी गार्ड्स को तो आयोजकों की ओर से खर्चा दिया गया। लेकिन सुरक्षा व व्यवस्था सहित 30 हजार से अधिक की भीड़ को संभालने वाली पुलिस को दोनों ही कार्यक्रमों में कुछ नहीं मिला। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पुलिस का काम केवल लॉ एंड ऑर्डर को देखना होता है, इसलिए उनकी कोई सिक्योरिटी फीस नहीं होती है। लेकिन इस मामले को लेकर शहर के कुछ मौजिज लोगो ने सवाल उठाए हैं।
ब्लैक टिकटों पर भी सरकार को वसूलना चाहिए टैक्स
इस मामले को लेकर शहर के आरटीआई एक्टिविस्ट आरके गर्ग ने कहा कि जब क्रिकेट मैच होता है तो पुलिस सुरक्षा के लिए बीसीसीआई से खर्चा वसूला जाता है। आयोजकों द्वारा दो हजार से ज्यादा की टिकट पर तो सरकार को टैक्स दिया जाता है, लेकिन उसके बाद हजारों की संख्या में जो टिकटें ब्लैक में बिकी है, सरकार को आयोजकों से उनका भी टैक्स वसूलना चाहिए। यह एक कर्मिशियल एक्टिविटी है, जिसमें हजारों की संख्या में पुलिस को तैनात किया गया और आयोजकों ने ग्राउंड के महज एक दिन के लिए 30 हजार रुपये खर्च करके करोड़ों रुपये कमाकर यहां से चले गए। इसलिए इस कार्यक्रम में जितने भी पुलिस जवानों को लगाया गया था, प्रशासन को उस हिसाब से आयोजकों से उनका खर्चा वसूलना चाहिए।
जब बीसीआई दे सकती है तो इनसे भी खर्च वसूल हाे
इस मामले को लेकर क्राफ्ड चेयरमैन हितेश पुरी ने कहा कि जब क्रिकेट मैच होने पर सरकार बीसीसीआई को क्रिकेटरों की सुरक्षा में लगाए गए जवानों का खर्च वसूलने के लिए बिल भेजती है तो प्रशासन को इस तरह कर्मिशियल कार्यक्रमों में लगाई जाने वाली पुलिस का भी खर्च मिलना चाहिए। एक व्यक्ति विशेष के कारण शहर में लगातार दो-तीन दिनों तक इतनी अव्यवस्था रही, सड़कों पर जाम रहा, सड़कों को दो दिन तक बंद रखा गया, लेकिन फायदा निजी आयोजकों को हुआ। दोनों कार्यक्रमों में 200 से अधिक लोगों के मोबाइल फोन गुम हो गए और सिरदर्दी पुलिस की बढ़ गई। इसलिए प्रशासन काे चाहिए कि इन दोनों कार्यक्रमों में जितने भी पुलिस जवान लगाए गए थे, उनका खर्चा आयोजकों से वसूला जाना चाहिए।