यूटी प्रशासन को आखिरकार शहर में महिलाओं की सुरक्षा का ध्यान आ ही गया। महिलाओं से यौन उत्पीड़न के मामले में केंद्र सरकार के बनाए कानून को लागू करने के लगभग दो माह बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने भी लागू कर दिया।
इसके तहत श्रम विभाग के अधीन आने वाले सभी सरकारी, निजी कार्यालयों व संगठनों में यौन उत्पीड़न निवारक कमेटी गठित करना अनिवार्य कर दिया है।
इस संबंध में शुक्रवार को उपायुक्त मोहम्मद शाईन की ओर से आदेश जारी किए गए। उपायुक्त की ओर से जारी आदेशों में स्पष्ट है कि जिस कार्यालय में दस या इससे अधिकारी कर्मचारी हैं, उन्हें आंतरिक विभागीय शिकायत कमेटी का गठन करना होगा।
यह कमेटी संबंधित कार्यालय की किसी महिला कर्मचारी की ओर से यौन उत्पीड़न के मामले में की गई शिकायत की पड़ताल करेगी। वहीं किसी कार्यालय में अगर दस से कम कर्मचारी हैं, वहां स्थानीय शिकायत कमेटी प्रभावी होगी जिसके अध्यक्ष उपायुक्त होंगे।
यहां अगर किसी महिला कर्मचारी के साथ यौन उत्पीड़न होता है तो वह सीधा उपायुक्त के पास शिकायत भेज सकती है।
इसी तरह अगर किसी कार्यालय की आंतरिक विभागीय शिकायत कमेटी के किसी सदस्य के खिलाफ कोई शिकायत होती है तो उसकी पड़ताल भी उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित होने वाली स्थानीय शिकायत कमेटी करेगी।
सभी विभागों ने नहीं किया था गठन :
ध्यान रहे कि केंद्र सरकार की ओर से सेक्सुअल हैरेसमेंट ऑफ वुमन एट वर्क प्लेस (प्रिवेंशन, प्रोहिबिटेशन एंड रिड्रेसल) एक्ट, 2013 को 9 दिसंबर, 2013 से लागू किया है।
इसके बाद चंडीगढ़ प्रशासन के समाज कल्याण विभाग ने 10 दिसंबर को सभी विभाग को कमेटी का गठन करने को कहा था। इसके रिमांइडर भी भेजे गए थे। लेकिन, प्रशासन के करीब 50 विभाग में से सिर्फ 10 विभागों ने ही कमेटी का गठन किया था।
प्रशासक शिवराज पाटिल के निर्देश पर भी 10 जनवरी को सभी विभागों को निर्देश भेजे गए थे। इसके बाद भी जब कमेटी का गठन नहीं किया गया तो उपायुक्त ने इस संबंध में शुक्रवार को निर्देश जारी कर दिए।