शहर में चल रहे मल्टीलेवल पार्किंग के निर्माण समेत करोड़ों रुपये के विकास कार्य संकट में आ गए हैं क्योंकि नगर निगम के पास इस समय काम करवाने के लिए राशि नहीं है।
खर्चों का ब्योरा न देने पर प्रशासन की ओर से नगर निगम की ग्रांट रोक ली गई है। इस कारण निगम को अपनी एफडी तोड़नी पड़ सकती है।
इस साल अब तक प्रशासन ने प्लान बजट में से सिर्फ पहली किस्त (36 करोड़) नगर निगम को दी है। हर तीन माह बाद किस्त आनी जरूरी है।
अब तक तीसरी किस्त आ जानी चाहिए थी लेकिन मामला पहली किस्त पर ही अटका है। मंगलवार को नगर निगम के अधिकतर ठेकेदारों ने हाथ खड़े कर दिए।
राशि जारी न होने पर ठेकेदारों एक प्रतिनिधिमंडल चीफ अकाउंट अफसर देसराज और चीफ इंजीनियर एसएस बिद्दा को मिला।
प्रतिनिधिमंडल ने तो देसराज के समक्ष रोष व्यक्त करते हुए चेतावनी दी कि अगर उनकी राशि जारी नहीं हुई तो वह धरने पर बैठ जाएंगे।
दो बार भेजा रिमाइंडर
प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार नगर निगम से उनकी ओर से किए जा रहे विकास कार्यों और उन पर प्रस्तावित खर्चे की सूची मांगी गई थी।
नगर निगम को 29 सितंबर और 14 अक्तूबर को दो बार रिमाइंडर भेजा गया है। लेकिन नगर निगम की ओर से सूची नहीं दी गई है। जबकि नगर निगम के अधिकारी इसे कोई स्थायी कारण नहीं मान रहे है।
एफडी के ब्याज से करोड़ो की कमाई
अगर जल्द ही प्रशासन की ओर से ग्रांट जारी न की गई तो नगर निगम को बैंक में जमा एफडी तुड़वानी पड़ेगी। इस समय नगर निगम की 440 करोड़ रुपये की एफडी है जिससे हर साल करीब 4 करोड़ रुपये ब्याज की कमाई होती है।
दो साल पहले नगर निगम की एफडी 500 करोड़ रुपये की थी। पिछले सालों में भी नगर निगम की ग्रांट रुकती रही है जिस कारण एफडी कम होती गई। पिछले साल तो एक बार एफडी 370 करोड़ रुपये पहुंच गई थी।
80 से 90 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं नॉन प्लान में
इस साल के वित्तीय वर्ष में अब तक 80 से 90 करोड़ रुपये विकास कार्यों पर खर्च हो चुके हैं जबकि प्लान बजट में अभी तक 36 करोड़ रुपये ही आए हैं।
नगर निगम ने प्लान बजट में जो अतिरिक्त खर्चा किया है, वह नॉन प्लान बजट से और निगम की आय से खर्च किया है।
नगर नगम के अधिकारियों के अनुसार प्लान बजट आने पर नॉन प्लान बजट से खर्च की जानी वाली राशि डाल दी जाएगी।
345 करोड़ रुपये पिछले 15 साल में रुके
प्रशासन की ओर से ग्रांट रोकना कोई नई बात नहीं है। पिछले 15 सालों में निर्धारित बजट से 345 करोड़ रुपये की ग्रांट रोकी गई है जो अभी तक जारी नहीं हुई है।
रुकी हुई ग्रांट में से 176.80 करोड़ रुपये की राशि तो साल 2011-12 में रोक दी गई थी जबकि उस समय प्रशासन को शहर से 1050 रुपये कमाई हुई थी।
इसके अलावा 65.83 करोड़ रुपये की ग्रांट साल 2009-10 में रुकी थी। पिछले साल इस ग्रांट को लाने के लिए तत्कालीन मेयर राज बाला मलिक ने काफी प्रयास किया लेकिन असफल रहीं।
मलिक का कहना है कि कॉर्डिनेशन कमेटी की बैठक में सलाहकार ने रुकी हुई ग्रांट जारी करने का आश्वासन दिया था।
नए विभाग आने से बढ़ना चाहिए हिस्सा
भाजपा पार्षद राजेश गुप्ता का कहना है कि तीन साल पहले प्राइमरी स्वास्थ्य, शिक्षा और वी-3 रोड नगर निगम को हस्तांतरित किए गए हैं।
ऐसे में प्रशासन को होने वाली कमाई का 22.5 प्रतिशत हिस्सा नगर निगम को बजट के तौर पर मिलना चाहिए जो कि इस समय 17.5 प्रतिशत दिल्ली पब्लिक कमीशन की ओर से मिल रहा है।
इस समय कौन-कौन से बड़े विकास के काम चल रहे हैं
सेक्टर-17 निर्माणाधीन मल्टीलेवल पार्किंगसेक्टर-17 में ओवरब्रिज के नीचे बूथों का निर्माणसेक्टर-38 में मल्टीलेवल पार्किंग का निर्माण3 बीआरडी में निर्माणाधीन ट्रीटमेंट प्लांट काइसके अलावा शहर में कई जगह सड़कों की कारपेटिंग और सामुदायिक केंद्रों का निर्माण हो रहा है।चीफ इंजीनियर एसएस बिद्दा का कहना है कि प्रशासन को शहर में चल रहे प्रोजेक्टों की जानकारी दे दी गई है। जल्द ही ग्रांट जारी होने की उम्मीद है। चीफ अकाउंट अफसर को फिलहाल ठेकेदारों के कामों की राशि जारी करने के लिए कहा गया है।
डिप्टी मेयर सतीश कैंथ का कहना है कि शहर के सांसद पवन बंसल हर साल शहर को ज्यादा से ज्यादा ग्रांट दिलवाते है ऐसे में प्रशासन को नगर निगम की ग्रांट नहीं रोकनी चाहिए बल्कि एडवांस में ग्रांट देनी चाहिए।