साढ़े 25 हजार का मोबाइल खरीदा, लेकिन कुछ दिनों बाद ही इससे परेशानी शुरू हो गई। मोबाइल कभी ऑटोमेटिक मोड चला जाता तो कभी स्लीप मोड तो कभी हैंग ही हो जाता था।
सर्विस सेंटर में मोबाइल दिया तो एक बार तो ठीक कर दिया, लेकिन एक सप्ताह बाद फिर खराब। सर्विस सेंटर में इसे फिर से रिपेयरिंग के लिए दिया गया। उसके बाद न तो मोबाइल ठीक किया गया और न ही बदल कर दिया गया। डेढ़ साल से यह मोबाइल सर्विस सेंटर में ही पड़ा रहा। आखिरकार मामला कंज्यूमर फोरम में पहुंचा।
फोरम ने आदेश दिए कि चूंकि डेढ़ साल बाद फोन ठीक करके देने का कोई मतलब नहीं रह जाता। लिहाजा ग्राहक को उसके साढ़े 25 हजार रुपये वापस किए जाएं।
फोरम में यह केस सेक्टर-11 स्थित मोबाइल मैजिक, नोकिया टेलीक्मयूनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड व सेक्टर-7 स्थित सेवन मोबाइल सर्विस सेंटर के खिलाफ किया गया था।
सेक्टर-8 निवासी समीर सचदेवा ने फोरम में दायर केस में कहा कि उन्होंने 21 फरवरी 2012 को मोबाइल मैजिक से नोकिया ई-7 खरीदा था। इसके कुछ दिनों बाद ही मोबाइल हैंग होने लगा।
दुकानदार को दिखाया तो उसने कहा कि स्विच ऑफ करने ऑन कर दिया करें। कुछ दिन ऐसे ही चला, लेकिन दिक्कतें बढ़ती चली गई। मोबाइल अपने आप स्लीप मोड पर जाने लगा। इसके बाद तीन अप्रैल को मोबाइल सर्विस सेक्टर-7 स्थित सर्विस सेंटर में दिया, जहां से ठीक करने के बाद उन्हें वापस दे दिया गया।
20 मार्च 2012 को फिर से मोबाइल खराब हो गया। उसके बाद न तो मोबाइल ठीक करके दिया गया और न ही खराब मोबाइल वापस किया गया।
फोरम में केस आने के बाद जब मोबाइल मैजिक को नोटिस गया तो उन्होंने जवाब दिया कि उनका काम मोबाइल बेचना है। मैन्यूफेक्चरिंग तो नोकिया ने की है।
वहीं, सेवन मोबाइल सर्विस सेंटर ने फोरम में नोटिस के बावजूद कोई जवाब नहीं दिया। फोरम ने पाया कि मोबाइल एक साल की वारंटी में था। सर्विस सेंटर ने उसे ठीक करके नहीं दिया, जोकि कंपनी से अधिकृत है।
उपभोक्ता को उसका मोबाइल न तो ठीक करके और न ही खराब हालत में वापस किया गया। लिहाजा साढ़े 25 हजार रुपये उपभोक्ता को पार्टली वापस करने के आदेश दिए।