सीटीयू और प्रशासन की लापरवाही से 59 लाख का नुकसान हुआ है। सीटीयू ने 2011 में 20 एसी बसें खरीदी थी जोकि लॉन्ग रूट पर चलाई जानी थी।
सीटीयू ने पहले तो इन्हें चलाया ही नहीं और जब चलाया गया तो लोकल रूट पर। लोकल रूट पर लॉन्ग रूट के मुकाबले कम फायदा होता है।
हाल ही में कंट्रोलर ऑफ ऑडिटर जनरल (कैग) की एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक सीटीयू ने जनवरी, 2011 में 20 एसी बसें खरीदी थी जोकि लॉन्ग रूट के लिए चलाई जानी थी।
इन बसों को पहले फरवरी-मार्च, 2011 के दौरान 57 दिनों तक चलाया ही नहीं गया जिससे 49.22 लाख का नुकसान हुआ। इसके बाद अप्रैल में 23 दिन ये बसें लॉन्ग रूट की बजाय लोकल चली जिससे 9.74 लाख का घाटा हुआ।
लॉन्ग रूट के लिए ही हुई थी डिजाइन
कैग की रिपोर्ट के मुताबिक ये बसें लोकल चलने लायक नहीं थी। इनका डिजाइन ही लॉन्ग रूट के लिए हुआ था। इन बसों की ऊंचाई लोकल बसों से डेढ़ फीट ज्यादा थी। इनमें न तो हैंडल बार थे और इनके दरवाजे भी छोटे थे। दरवाजे लो फ्लोर बसों से ज्यादा ऊंचे थे।
अपनी बात से मुकरा सीटीयू
कैग की इस रिपोर्ट पर अपनी गलती स्वीकार करते हुए सीटीयू ने जवाब दिया था कि अब लॉन्ग रूट की बसें लॉन्ग रूट पर और लोकल की लोकल रूट पर चलाईं जाएंगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
जवाब भेजे जाने के बाद अब सीटीयू ने 2 दिसंबर 2013 को अपने 15 लॉन्ग रूट और बंद कर दिए। इन्हें लोकल रूट पर चला दिया गया है। इन बसों के बंद होने से आम लोगों को भी काफी परेशानियां हो रही हैं।
लोकल रूट के लिए नहीं खरीदीं बसें
लोकल ट्रांसपोर्ट सिस्टम को मजबूत करने के लिए सीटीयू ने लॉन्ग रूट बंद किए हैं जबकि लोकल के लिए अलग से बसें खरीदी जानी हैं। इन बसों की खरीद के लिए प्रशासन को केंद्र से करोड़ों की ग्रांट भी आ चुकी हैं, लेकिन अभी तक बसें नहीं खरीदी गई। फिलहाल लोकल रूट के लिए 49 मिडी बसें खरीदने की प्रक्रिया चल रही है।
सीटीयू के डायरेक्टर टीपीएस फुलका के मुताबिक शहर के लोगों की सहूलियत हमारी प्राथमिकता है। प्रशासन के आदेशों पर लोकल रूट पर इन बसों को चलाया गया लेकिन अब शहर में चलाने के लिए बसें खरीदी जा रही हैं। 49 मिडी बसों की खरीद का टेंडर किया जा चुका है।