जब मैं तीन वर्ष की थी तो परिवार से रंजिश रखने वालों ने मेरे ऊपर एसिड फेंक दिया। मेरा चेहरा खराब हो गया और आंखों की रोशनी चली गई। तीन साल तक दिल्ली के एम्स अस्पताल में इलाज चला लेकिन मैं दोबारा दुनिया नहीं देख पाई। जब आठ वर्ष की हुई तो माता-पिता ने पहली कक्षा में एडमिशन दिलाया। यह कहना है चंडीगढ़ के सेक्टर-26 स्थित ब्लाइंड स्कूल की छात्रा कैफी का। कैफी ने सीबीएसई 10वीं परीक्षा में 95.20 प्रतिशत अंक लाकर स्कूल में टॉप किया है।
कैफी ने बताया कि उनका परिवार हरियाणा के हिसार जिले का रहने वाला है। उनके पिता पवन चंडीगढ़ के सेक्टर-17 में हरियाणा सरकार के एक विभाग में चपरासी हैं जबकि मां सुमन हाउस वाइफ हैं। कैफी ने बताया कि उसके साथ जो घटना घटी वह हिसार में घटी थी, जिस वक्त हादसा हुआ था, उस दिन होली थी। मैं अपने अंकल के घर के बाहर उनके साथ बैठी थी।
गांव में हमारे परिवार से रंजिश रखने वाले कुछ लोगों आए तो मेरे अंकल ने सोचा कि वह शायद होली का रंग लगाने आए हैं लेकिन उन लोगों ने पास आते ही मेरे ऊपर एसिड फेंक दिया। उससे मेरा चेहरा हमेशा के लिए खराब हो गया और मेरी आंखों की रोशनी भी चली गई। इस घटना ने मेरा पूरा जीवन खराब कर दिया। इस सबके बावजूद पढ़ाई के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहती हूं। भविष्य में आईएएस ऑफिसर बनना चाहती हूं।