चंडीगढ़। डेढ़ लाख रुपये की रिश्वत मामले में सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के साइंटिस्ट आरोपी ज्ञानेंद्र राय ने वीरवार को सीबीआई अदालत में जमानत याचिका दायर की है। आरोपी ने याचिका में उल्लेख किया कि उनका नाम एफआईआर में नहीं है। उन्होंने न तो रिश्वत की मांग की है और न ही रिश्वत प्राप्त की है। न ही उनसे किसी प्रकार की रिकवरी की गई है। मामले में उनकी किसी प्रकार की भूमिका नहीं है। उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया जा रहा है। उनके खिलाफ की गई जांच बेबुनियाद है। मामले से संबंधित चालान भी पेश किया जा चुका है। इस याचिका के आधार पर अदालत ने नोटिस जारी कर सीबीआई से जवाब मांगा है।
दरअसल, अक्टूबर 2013 में गुरुग्राम के एक प्राइवेट बॉटलिंग प्लांट की एनओसी की एक फाइल सेक्टर-27 स्थित सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड को भेजी गई थी। इस फाइल को हाइड्रोलॉजिस्ट संजय पांडे को क्लीयर करना था। आरोप के मुताबिक, फाइल क्लीयर करवाने के लिए कंपनी के डायरेक्टर स्वराज कंडोई की इमटेक के साइंटिस्ट चंद्र प्रकाश मिड्ढा के जरिए संजय पांडे के साथ दो लाख रुपये में बात हुई थी। स्वराज कंडोई ने रिश्वत के डेढ़ लाख रुपये अपने एक कर्मचारी दिनेश कुमार के हाथ चंडीगढ़ भेजे। रिश्वत की रकम चंद्र प्रकाश मिड्डा के घर पर पहुंचाने की बात हुई थी। दिनेश रिश्वत की रकम लेकर सेक्टर-39 स्थित साइंटिस्ट मिड्डा के घर पहुंचा, जहां सीबीआई ने पहले से ही ट्रैप लगाया हुआ था और रिश्वत की रकम के साथ सीबीआई ने साइंटिस्ट मिड्डा और दिनेश को गिरफ्तार कर लिया गया था। बाद में इस मामले में साइंटिस्ट ज्ञानेंद्र राय का भी नाम सामने आया, जिसके बाद सीबीआई ने उनको भी गिरफ्तार कर लिया। मई 2020 में मामले से संबंधित चालान पेश किया गया था।