धोखाधड़ी के आरोपी को जमानत मिलने के बाद बिना अनुमति देश छोड़ने व अदालत के आदेश के बावजूद पेश न होने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई।
हाईकोर्ट ने कहा कि कानून का मजाक बनाया जा रहा है और याची के मन में कानून के लिए कोई सम्मान नहीं है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द करने के लिए दाखिल की गई याचिका को 10 लाख रुपये जुर्माना लगाते हुए खारिज कर दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए विलियम ने हाईकोर्ट से 17 जुलाई 2018 को बटाला में दर्ज धोखाधड़ी व अन्य धाराओं में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की हाईकोर्ट से अपील की थी। मामला एक ट्रस्ट की जमीन से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ता सहित राजस्व विभाग के अधिकारियों पर भी आरोप हैं। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को पंजाब पुलिस ने बताया कि ट्रायल कोर्ट से जमानत मिलने के बाद याची ने विदेश जाने की अनुमति मांगी थी। ट्रायल कोर्ट ने इसकी अनुमति देने से इन्कार कर दिया था। इसके बाद कोर्ट को बिना बताए याची विदेश चला गया। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि याची हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पेश नहीं हुआ।
कानूनी प्रक्रिया का मजाक बना रहा, सबक सिखाना जरूरी
ट्रायल कोर्ट ने उसे विदेश जाने की अनुमति नहीं दी थी फिर भी वह विदेश चला गया। याची के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी किया गया, लेकिन वह पेश नहीं हुआ। यह सब याची की ओर से कानूनी प्रक्रिया से बचने के लिए किया गया। याचिकाकर्ता ने ऐसा करके यह साबित कर दिया है कि उसकी नजर में कानून के लिए सम्मान नहीं है। हाईकोर्ट ने याची को अदालत के समक्ष पेश होने का आदेश दिया, लेकिन उसका भी पालन नहीं किया गया। याची की यह हरकत बता रही है कि वह कानूनी प्रक्रिया का मजाक बना रहा है। ऐसे में इस प्रकार के आचरण के लिए उसे सबक सिखाना जरूरी है। हाईकोर्ट ने उसकी याचिका को खारिज करते हुए उस पर 10 लाख रुपये जुर्माना लगाया है।