मधुबन स्थित हरियाणा की फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) में डीएनए पीसीआर किट खरीद में भ्रष्टाचार के मामले में एफएसएल की उपनिदेशक और तीन अन्य निजी कंपनियों के निदेशकों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने चारों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत केस दर्ज करने के बाद उनकी तलाश शुरू कर दी है।
आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही खरीद में हुए भ्रष्टाचार के मामले की परतें खुलेंगी। हरियाणा पुलिस के मामला सौंपने के बाद एसीबी ने जांच की। पुख्ता सबूत मिलने पर एसीबी ने सरकार से केस दर्ज करने की अनुमति मांगी। अनुमति मिलते ही एसीबी करनाल ने एफएसएल की उप निदेशक डॉ. अनिता, दिल्ली की कंपनी मेसर्स माइजिन लाइफ सॉल्यूशन के निदेशक नीरज गौड़, कंपनी के ऑपरेशन सेल्स मैनेजर बृज सिंह और गुरुग्राम की कंपनी मेसर्स थर्मोफिशर ऑपरेशन सेल्स मैनेजर चंद्रभान चौधरी पर केस दर्ज कर लिया।
रिकॉर्डिंग में भ्रष्टाचार के कई सबूत
एसीबी के सूत्रों का दावा है कि व्हाट्सएप कॉल रिकार्डिंग में भ्रष्टाचार के कई सबूत हैं। रिकॉर्डिंग में उपनिदेशक डॉ. अनिता व एक कंपनी के अधिकारी की बातचीत है। इसके अलावा डॉ. क्वात्रा और कंपनी के अन्य अधिकारियों की बातचीत है। इसमें पैसे के लेनदेन को लेकर बातचीत है। एसीबी ने इन्हीं को आधार बनाते हुए केस दर्ज किया है। सूत्रों का दावा है कि एसीबी के पास शिकायतकर्ता ने कई रिकार्डिंग सौंपी हैं।
2021 में दिया था खरीद टेंडर
2021 में मधुबन करनाल स्थित एफएसएल के लिए डीएनए पीसीआर किट खरीदने के लिए हरियाणा मेडिकल सर्विस कारपोरेशन ने माइजिन लाइफ सॉल्यूशन कंपनी को छह करोड़ का टेंडर जारी किया था। इसके लिए एक कमेटी बनाई गई थी, जिसमें डॉ. अनिता, डॉ. राजीव समेत अन्य शामिल थे। करीब एक करोड़ किट और अन्य सामान आपूर्ति किया जा चुका था। इस मामले में सहायक निदेशक डॉ. क्वात्रा ने आरोप लगाया था कि टेंडर अवार्ड के बाद भ्रष्टाचार हुआ है।
सबूत के तौर पर कुछ वीडियो पेन ड्राइव में डालकर दी थी, जिसमें कंपनी के पदाधिकारी राजीव क्वात्रा से बातचीत में रिश्वत देने, दबाव बनाने और चंडीगढ़ में एक अधिकारी से मुलाकात होने की बात को बोल रहे हैं। बाद में इस मामले में दो एसआईटी बनाई गई थी। इसमें 20 लाख मांगने और 11 लाख देने की बात है।