एसएफएस के पदाधिकारियों द्वारा एबीवीपी के कार्यकर्ता की पिटाई के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी में माहौल गरमा गया। सोमवार को दोनों संगठन आमने सामने आ गए, लेकिन पुलिस की सूझबूझ से बवाल नहीं हुआ। एसएफएस और एबीवीपी संगठन ने स्टूडेंट सेंटर पर प्रदर्शन कर जमकर नारेबाजी की।
इस दौरान दोनों संगठनों ने एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप भी लगाए। उधर, एबीवीपी ने कहा कि मारपीट करने वाले छह लोगों पर रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। उन्होंने कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं एसएफएस ने भी ऐलान कर दिया कि मां, बहन और बेटियों के खिलाफ कोई बोलने की कोशिश करेगा तो वह किसी भी हद तक जा सकते हैं।
वामपंथियों का रहा है हिंसा का इतिहास : हरीश गुर्जर
दोपहर एक बजे एबीवीपी के कार्यकर्ता पीयू के स्टूडेंट सेंटर पर पहुंच गए। देखते ही देखते विद्यार्थियों की भीड़ जमा हो गई। पदाधिकारियों ने एसएफएस के खिलाफ नारेबाजी की। एबीवीपी के पीयू अध्यक्ष हरीश गुर्जर ने कहा कि वामपंथियों का हिंसा का इतिहास रहा है। उन्होंने इस बार फिर से ऐसा किया है और अब उन्होंने ब्वॉयज हॉस्टल नंबर 3 में दिव्यांश पर हमला किया और हमला करने के बाद उन्होंने पीड़ित कार्ड खेलना शुरू कर दिया और लोगों की धार्मिक भावना को आहत करने की कोशिश की।
सचिव प्रिया शर्मा ने कहा ये लोग लोकतंत्र की बात करते हैं और कानून व्यवस्था की बात करते हैं, लेकिन वे खुद इसका पालन नहीं करते। वह जिस तरह का पाखंड करते हैं वह उनके कार्यों के माध्यम से दिखाई देता है। नीरज पंत, जिला संयोजक परविंदर सिंह कटोरा ने कहा कि इनको पीयू में आतंक फैलाने की अनुमति नहीं देंगे। एबीवीपी कार्यकर्ता हिंसक कार्यों के खिलाफ मजबूती से खड़ा रहेगा और उन्हें अपने हिंसक एजेंडे में सफल नहीं होने देगा। विश्वास है कि कानून व्यवस्था घायल कार्यकर्ता के साथ न्याय करेगी।
बहन, बेटियों के खिलाफ गलत बोलने वालों को देंगे जवाब : एसएफएस
इसी बीच एसएफएस के पदाधिकारी भी दूसरी ओर प्रदर्शन के लिए खड़े थे। पुलिस ने सूझबूझ से काम लिया और एबीवीपी के कार्यकर्ताओं को हटाया। उसके बाद एसएफएस का प्रोटेस्ट शुरू हो गया है। इस दौरान अध्यक्ष वरिंदर सहित पदाधिकारियों ने नारेबाजी की। अमन समेत कई पदाधिकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि बहन, बेटियों के साथ कोई भी गलत करने की कोशिश करेगा उसका हश्र बुरा होगा। गंदे कमेंट कर एबीवीपी कार्यकर्ता ने गलती की थी।
उसे माफी मांगनी चाहिए थी, लेकिन वह उल्टा एसएफएस के कार्यकर्ताओं से उलझ गया। उन्होंने कहा कि एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने हॉस्टल नंबर एक के पास एसएफएस के कार्यकर्ता पर हमला करने की कोशिश की। एबीवीपी अगर ऐसा करेगी तो बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि एबीवीपी कार्यकर्ता के साथ मारपीट नहीं की गई है। आपसी झड़प में चोट लगी थी। प्रदर्शन के बाद पुलिस ने दोनों संगठनों के कार्यकर्ताओं को अलग-अलग दिशाओं में भेज दिया।
छात्र की पिटाई के बाद एसएफएस से अलग हुआ आइसा
वामपंथी संगठनों में से एक आइसा है। यह संगठन एसएफएस के कई प्रदर्शनों में साथ रहा है और साथ भी देता आया है। लेकिन एबीवीपी कार्यकर्ता की पिटाई के मामले का इन्होंने समर्थन नहीं किया और न ही एसएफएस के समर्थन में प्रोटेस्ट किया। आइसा ने छात्र की पिटाई के मामले को गैर-जिम्मेदाराना और बचकाना बताया। कहा कि इस तरह की कार्यवाई देशभर में जारी जनतांत्रिक आंदोलन का नुकसान कर सकती हैं।
एसएफएस के वामपंथी झुकाव के चलते इस तरह की कार्रवाइयां आज के संघर्ष में उतरे हुए लिबरल, अल्पसंख्यक ताकतों में वामपंथियों की छवि अराजक तत्वों वाली बना सकती हैं। इसलिए एसएफएस को इस संदर्भ में आत्म-आलोचना और संयम के साथ काम करना चाहिए। कहा कि हम सभी यह भी जानते हैं कि आरएसएस का आईटी सेल विशेष रूप से अश्लील शब्दों के साथ महिला कार्यकर्ताओं को हतोत्साहित करने की कोशिश लगातार करता है।
लेकिन मार-पिटाई द्वारा इन का जवाब देने के बजाय, स्वरा भास्कर, कविता कृष्णा, दीपिका पादुकोण जैसी कितनी ही साहसी महिलाओं के जरिये दिए गए जवाब के माध्यम से काम लेना चाहिए था। उन्होंने बुद्धिमता, सयंम व दृढ़ता से काम लिया। आइसा यूटी अध्यक्ष अमन रतिया ने बताया कि फासीवाद के खिलाफ वह आवाज उठाते रहेंगे।