देखिए इन बच्चों को, इन्होंने गजब के साइंटिफिके मॉडल बनाकर यह दिखाने की कोशिश की है कि यदि उन्हें मौका और संसाधन दिए जाएं तो वे भी भविष्य के 'कलाम' बन सकते हैं। किसी भी राष्ट्र की प्रगति का आधार विज्ञान होता है। विज्ञान नहीं तो देश के लोग शिक्षित नहीं होंगे और अंधविश्वासों की चपेट में पूरा राष्ट्र रहेगा। वैज्ञानिक सोच की नींव बचपन से ही डालनी होगी।
स्कूल टाइम में ही अगर विद्यार्थियों के अंदर वैज्ञानिक सोच पैदा कर दी जाएगी तो वयस्क होते-होते वह समाज और देश को एक अलग नजरिए से देखने लगेंगे। इतना ही नहीं एक अच्छे नागरिक बनने के साथ राष्ट्र निर्माण में अपना अमूल योगदान भी देंगे। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने भी कहा है कि युवाओं का दिमाग तेजस्वी और प्रज्ज्वलित होना चाहिए।
दीवारों पर उगी बेल मेंटेन करेंगी रूम का तापमान
अनोखा आविष्कार
नाम: निशा शर्मा और कुमकुम
कक्षा : आठ
स्कूल: गवर्नमेंट माडल हाईस्कूल सेक्टर-41डी चंडीगढ़
टीचर: पुनीत मदान
मॉडल : आठवीं क्लास के इन विद्यार्थियों ने एक ऐसा मॉडल है, जो जगह, रुपये, एनर्जी और समय को सही तरह से मैनेज करने का विकल्प सुझाता है। मॉडल यह संदेश भी देता है कि हमारे आसपास कुछ ऐसी चीजें हैं, जो काम की हैं। बस उनका इस्तेमाल करना आना चाहिए। बच्चों ने बहते नाले से मिथेन गैस को कुकिंग गैस में तब्दील कर दिया। रूम के तापमान को मेंटेन करने के लिए दीवारों पर बेल उगा दी, जो गर्मी में रूम को ठंडा और ठंडे मौसम में रूम को गर्म रखती हैं। रूफ प्लांटेशन में हर्बल और मेडिसिन प्लांट उगाने का आइडिया भी दिया है। इसके जरिए फर्स्ट एड की बीमारियों को कंट्रोल करने में काफी मदद मिलती है। इन विद्यार्थियों ने सोलर प्लांट लगाए हैं। साथ में चार्जर की भी व्यवस्था रखी है। इससे इलेक्ट्रिक्ल व्हीकल को चार्ज किया जा सकता है। तीन तरह के गारबेज कलेक्शन और इसकी आटोमैटिक सूचना नगर निगम तक पहुंचाने का अद्भुत मॉडल भी इन बच्चों ने पेश किया है।
बैटरी से चलने वाला एयरोप्लेन बना डाला
अनोखा आविष्कार
नाम: खलीन मोहन
स्कूल: गुरु गोबिंद सिंह सीनियर सेकेंडरी स्कूल 35बी
टीचर: अंजलि
मॉडल : खलिन मोहन ने एक ऐसा एयरोप्लेन का मॉडल बनाया है, जो बैटरी से संचालित होता है। जब बैटरी डिस्चार्ज होने लगती है तो उसे सोलर एनर्जी से चार्ज करने का विकल्प भी मौजूद है। इस दौरान उन्होंने प्लेन को उड़ाकर दिखाया भी। उनका दावा है कि यदि उन्हें पैसे मिलें तो वह इस मॉडल के आधार पर बड़ा हवाईजहाज भी बना सकते हैं। वह पार्ट टाइम में एयरोप्लेन बनाकर बेचते भी हैं। खलिन का कहना है कि जो जैसा चाहता है, वैसा ही हवाईजहाज बना देता हूं। मौजूदा समय में एयरफ्यूल से ही हवाई जहाज उड़ते हैं, जो काफी महंगा है। एक सेकेंड में चार से पांच लीटर तेल खप जाता है। उनके दावे के मुताबिक उन्होंने जो हवाईजहाज बनाया है, वह भारत का पहला बैटरी चालित एयरोप्लेन मॉडल है। नासा ने एक या दो मॉडल बनाए हैं। बैटरी संचालित एयरोप्लेन की एक खासियत यह भी है कि इसके चलने से प्रदूषण नहीं होगा और यदि कोई इसकी एबीसी सीखना चाहता है तो वह भी इसपर हाथ आजमा सकता है। एयरप्लेन बनाना और उड़ाना खलिन का शौक है। वह देश के लिए एक ऐसा प्लेन बनाना चाहते हैं, जिसके उड़ाने में नाम मात्र का पैसा खर्च हो।
गाय की गैस से चलेगी गाड़ी
अनोखा आविष्कार
नाम: अक्षय मदान और देव शर्मा
स्कूल: गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-8बी
टीचर: परमजीत सिंह
मॉडल : गाय के पेट के अंदर मेथेनोजेन नाम का एक बैक्टीरिया होता है, जो उसकी पाचन क्रिया में सहयोग करता है। पाचन के दौरान मीथेन गैस भी उत्पन्न होती है। यह गैस गाय सहित उन जानवरों में भी पाई जाती है, जो चारा खाते हैं। इन विद्यार्थियों ने अपने मॉडल में बताया है कि इन पशुओं को एक बाड़े में रखा जाएगा, जिसकी छत में वैक्यूम पंप लगे होंगे। पशु जब गैस निकालेंगे तो मिथेन हल्की गैस होने के कारण ऊपर की ओर जाएगी, जहां से वैक्यूम पंप इसे खींचकर गोबर गैस प्लांट तक सप्लाई करेगा। वहां पहले से ही मीथेन गैस बड़ी मात्रा में उपलब्ध रहेगी। दोनों गैस के मिलने से इनकी मात्रा काफी बढ़ जाएगी, जिन्हें रासायनिक और भौतिक विधियों द्वारा अलग-अलग कर शुद्ध मिथेन गैस प्राप्त कर ली जाएगी। यह सीएनजी का एक ही रूप है। इसका इस्तेमाल ईंधन के तौर पर वाहनों में और अन्य उद्योगों में किया जा सकता है, जिससे पर्यावरण भी शुद्ध होगा और ग्रामीणों को आय का एक नया साधन प्राप्त होगा।
ट्रैफिक जाम पर प्रदूषण नहीं फोटो
अनोखा आविष्कार
नाम: विशांत मलिक और लेनिश शर्मा
स्कूल: जीएमएसएस एस सेक्टर 8 बी
टीचर: परमजीत सिंह
मॉडल : इन विद्यार्थियों ने ‘टू वे ट्रांसपोर्ट सिस्टम विद जीरो पॉल्यूशन’ नामक मॉडल बनाया है। उन ट्रैफिक प्वाइंट के लिए बनाया गया है, जहां पर हर वक्त जाम लगा रहता है। ट्रैफिक धीमा होने के कारण कार्बन का उत्सर्जन ज्यादा होता और इन जगहों पर एयरक्वालिटी इंडेक्स तय लिमिट से कई गुना अधिक होता है। विद्यार्थियों ने बताया है कि इन स्थानों पर पाइपों का एक नेटवर्क बनाया जाए और निकल रही गैस को खींचकर रासायनिक प्लांट में भेजी जाए, यहां पर गैस के हर कण को अलग करते हैं और उपयोगी पदार्थ बनाते हैं। इसके दो फायदे हैं। पहला, हानिकारक गैस का सही इस्तेमाल और शहरवासियों को प्रदूषण को मुक्ति। जब ट्रैफिक धीमा होता है तो वाहन भी धीमे होते हैं। इससे डीजल और पेट्रोल ज्यादा खर्च होते हैं। ज्यादा जलते हैं और आसपास के पेड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे पेड़ आक्सीजन भी कम छोड़ते हैं। माडल में एक फौव्वारा भी बनाया गया, जो बढ़े प्रदूषण को शीघ्रता से नियंत्रित करने का काम करेगा। इससे प्रदूषण के कण नीचे आ जाएंगे। गाड़ियों के एग्जास्ट से निकलने वाले हानिकारक कणों को वहीं पर नियंत्रित करने का भी एक आइडिया दिया गया है।
विज्ञान मॉडल का निर्माण विद्यार्थी में वैज्ञानिक सोच को कार्य रूप में परिवर्तित करने का अवसर प्रदान करता है। उसके बच्चों के अंदर छिपी रचनात्मकता, जिज्ञासा और कल्पनाशीलता को पंख लगते हैं। विज्ञान प्रदर्शनी और इस प्रकार के आयोजन समाज में विज्ञान की गंगा को सतत रूप से प्रवाहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करते हैं।
- परमजीत सिंह, व्याख्याता भौतिक शास्त्र, जीएमएसएसए सेक्टर 8बी