फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जालंधर: आप विधायक के अचानक पहुंचने पर खुली स्मार्ट स्कूल की पोल, महिला प्रिंसिपल दो माह से नहीं आ रही, इमारत निर्माण में भी घालमेल

Tue, 15 Mar 2022 08:53 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर (पंजाब)

सार

सरकार बदलने का असर सरकारी तंत्र पर तो दिखने लगा है लेकिन घूसखोर अभी भी बेलगाम हैं। सरकारी दफ्तरों में आने वाले लोगों की प्रतिक्रियाएं बदली हैं, सरकार के साथ प्रशासनिक अधिकारियों का लहजा भी बदल गया है।
विज्ञापन
विधायक रमन अरोड़ा चौगिटी के सरकारी स्कूल पहुंचे। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पंजाब सरकार ने हाल ही में पंजाब में स्मार्ट स्कूल बनवाने की कवायद शुरू की थी। इन स्कूलों को लेकर पंजाब सरकार के मंत्रियों ने काफी वाहवाही लूटी। पंजाब में सत्ता परिवर्तन होते ही इन स्मार्ट स्कूलों की पोल खुलना शुरू हो चुकी है। मंगलवार को आम आदमी पार्टी के सेंट्रल हलके से विधायक रमन अरोड़ा ने चौगिटी के सरकारी स्कूल में औचक निरीक्षण किया। इस दौरान सामने आया कि स्कूल की प्रिंसिपल पिछले दो माह से स्कूल नहीं आ रही हैं। इस बारे में स्कूल के स्टाफ से उन्होंने पूछा तो स्टाफ इस सवाल से बचता दिखाई दिया। 

विज्ञापन


रमन अरोड़ा ने हाजिरी रजिस्ट्रर मंगवाया तो स्टाफ खुद बोल उठा कि प्रिंसिपल तो पिछले दो माह से छुट्टी पर हैं। इस बीच एक स्टाफ सदस्य बोला कि मैडम आती हैं और हाजिरी लगाकर चली जाती हैं। क्लर्क भी चुनाव के बाद स्कूल नहीं आए। इस स्कूल की इमारत की जांच रमन अरोड़ा ने खुद हाथों में छेनी-हथौड़ी लेकर की। 

जांच में सामने आया कि इस स्कूल की नईं इमारत में कई खामियां हैं। स्कूल की छत पर बिना प्लास्टर के रंग कर दिया गया। इस बारे में जब ठेकेदार से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ऐसे स्कूलों की छत पर प्लास्टर की जरूरत नहीं होती। टेंडर के हिसाब से स्कूल में कार्य करवाया जा रहा है। इसके बाद जब टेंडर की रकम के बारे में पूछा गया तो विभाग के जेई ने 82 और ठेकेदार ने 85 लाख कहा। इस बात से गुस्साए विधायक ने जेई से लेकर ठेकेदार की जमकर क्लास लगाई। 

विज्ञापन

सरकारी स्कूल में नहीं पढ़ रहा था किसी अध्यापक का बच्चा 
सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे अध्यापक खुद तो सरकार से हजारों रुपये सैलरी ले रहे हैं लेकिन सरकारी स्कूलों पर उनका विश्वास नहीं है। विधायक रमन अरोड़ा चौगिटी के सरकारी स्कूल में पढ़ा रहे अध्यापकों से पूछा कि किसी का बच्चा सरकारी स्कूल में पढ़ता है तो सभी ने न में सिर हला दिया। इससे यह साफ होता है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाकर हजारों रुपये लेने वाले अध्यापक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में न पढ़ाकर प्राइवेट स्कूलों में पढ़ा रहे हैं।

सरकार बदली, बदल रहा प्रशासनिक अफसरों का लहजा
सरकार बदलने का असर सरकारी तंत्र पर तो दिखने लगा है लेकिन घूसखोर अभी भी बेलगाम हैं। सरकारी दफ्तरों में आने वाले लोगों की प्रतिक्रियाएं बदली हैं, सरकार के साथ प्रशासनिक अधिकारियों का लहजा भी बदल गया है। काम को बेवजह रोककर रखने वाले अफसरों में अब डर और लोगों के प्रति जिम्मेदारी का एहसास होने लगा है।
 
डीसी दफ्तर में काम करवाने आए लोगों ने कहा कि अब पंजाब में आम आदमी का राज है और बुधवार को भगवंत के मुख्यमंत्री पद की शपथ के साथ ही बदलाव की नई इबारत लिखी जाएगी। लोग शिकायतें लेकर कमिश्नर ऑफिस पहुंचे लेकिन कमिश्नर ही नहीं थे वहां इंतजार करने वालों की लाइनें लग गई। आनन-फानन दूसरे अधिकारियों से मिलकर लोगों के काम करवाए। 
विज्ञापन

आदमपुर के गांव कठार से लंबरदारी के पैसे लेने आए जगत सिंह ने कहा कि वह 85 साल के हो चुके हैं और 2016 से लंबरदारी के पैसों के लिए पटवारी के आगे पीछे चक्कर काट रहे थे। वह सात साल में हर हफ्ते डीसी दफ्तर का चक्कर लगाते रहे लेकिन उनकी कोई नहीं सुन रहा था। हाल ही में अब एसडीएम से मिले तो सकारात्मक जबाव मिला कि पैसे मिल जाएंगे। अब उन्हें लगता है कि आम आदमी की सरकार पहले क्यों नहीं आई। शुक्र है मेहनत के पैसों के लिए अब हर हफ्ते पसीना नहीं बहाना पड़ेगा।

मकसूदां के गुरु अंगद नगर के रहने वाले रघुवीर सिंह ने बताया कि वह रजिस्ट्री करवाने आए थे और पिछले कई दिनों से अफसरशाही के आगे चक्कर काट रहे हैं। सरकारी दफ्तरों में भीड़ के जिम्मेदार भी प्रशासनिक अधिकारी हैं, पैसों के लिए अगर कागजों में खामियां निकालने के बजाय काम करने लगे तो ये लाइन स्वत: खत्म हो जाएंगी। 

अफसरों के रवैये में थोड़ा बदलाव जरूर आया है लेकिन काम करने में कोई तेजी नहीं आई। तारीख पर आए जसबीर सिंह ने कहा कि प्रशासन सरकार के इशारों पर चलता है और अफसरशाही मनमर्जी से, बदलाव 16 मार्च को भगवंत मान के शपथ लेने के बाद देखने को मिलेगा। अकाली-भाजपा व कांग्रेस सरकार में अफसरशाही के काम करने का तरीका अलग था क्योंकि सरकार जो चाहती थी वहीं हो रहा था अब जब सरकार गांवों से चलने वाली है तो बदलाव की आस जगी है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें