आम आदमी पार्टी ने बुधवार को एसवाईएल के मुद्दे पर राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर को ज्ञापन सौंपा। पार्टी ने मांग की है कि पंजाब केपानी पर फिलहाल तीन माह तक कोई फैसला न किया जाए। जिस तरह एक दशक से यथास्थिति बहाल है, उसकी तरह रखी जाए।
गुरप्रीत घुग्गी, एचएस फूलका की अगुवाई में गए दल द्वारा सौंपे ज्ञापन में कहा गया है कि राइपेरियन कानून के मुताबिक पंजाब का नदियों के पानी पर पूरा अधिकार है। ज्यादातर पंजाबियों की आजीविका का साधन खेती है, जिसकेलिए वे पानी पर निर्भर हैं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला सिर्फ राष्ट्रपति के लिए है, ऐसे विचारों को मानना लाजिमी नहीं होता। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकार का फर्ज है कि वह पंजाब के साथ हो रही बेइंसाफी का हल ढूंढे। पंजाब के अधिकारों की चौकीदारी और दूसरे राज्यों को दिए पानी की बनती राशि मिलनी यकीनी बनाएं।
पंजाब में पानी का संकट केंद्र सरकार ने पैदा किया है। पहले किया गया समझौता जितने पानी के आधार पर किया गया था, पंजाब में अब उतना पानी ही नहीं है। ज्ञापन में कहा गया है कि कुछ राजनीतिक पार्टियां अपने हितों के लिए इस मुद्दे का दुरुपयोग करने का प्रयास कर रही है। अगर कोई हिंसक घटना घटती है तो अगले तीन माह में चुनाव रद करने के हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा, जिसके बुरे नतीजे निकलेंगे। पूरे दस साल अकाली हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा। एनडीए के समक्ष इस मुद्दे को नहीं उठाया। आप ने मांग की कि अगले तीन माह तक पानी के मुद्दे पर कोई फैसला न लिया जाए। यथास्थिति वैसी ही बहाल रखी जाए। सूबे में चुनाव होने हैं, इस मुद्दे पर जरूरत से अधिक जोर नहीं दिया जाना चाहिए। कानून-व्यवस्था सबसे अहम है, उसके साथ समझौता नहीं किया जाना चाहिए।