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जेटली की ‘बजट’ पोटली से लघु उद्यमी नाखुश, एक सुर में बोले- दिल तोड़ दिया

Fri, 02 Feb 2018 09:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना(पंजाब)
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Budget 2018 - फोटो : अमर उजाला
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केंद्र की मोदी सरकार ने वीरवार को संसद में अपना अंतिम पूर्ण बजट पेश किया। बजट प्रावधान माइक्रो स्माल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज (एमएसएमई) उद्योगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। इससे लघु उद्यमियों में निराशा का आलम है। नोटबंदी के बाद जीएसटी की मार झेल रहे उद्यमियों को बजट में बूस्टर डोज मिलने की उम्मीद थी, लेकिन केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। उद्यमियों का मानना है कि बजट में उद्योग जगत को पटरी पर लाने, निर्यात को बढ़ावा देने, मैन्यूफैक्चरिंग में गति प्रदान करने का कोई उपाय नहीं किया गया है।
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चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कामर्शियल अंडरटेकिंग्स (सीआईसीयू) के बैनर तले उद्यमियों ने बजट प्रावधानों पर मंथन के लिए पार्क प्लाजा में एक पैनल मंथन आयोजित किया गया। वहीं बजट भाषण खत्म होने के साथ ही अधिकतर उद्यमी निराश ही नजर आए। चैंबर के प्रधान उपकार सिंह आहूजा ने कहा कि मोदी सरकार का बजट उद्योग जगत की उम्मीदों पर कतई खरा नहीं उतरा। नोटबंदी एवं जीएसटी की सबसे अधिक मार छोटे उद्योगों पर पड़ी थी, लेकिन इस सेक्टर की पूरी तरह से अनदेखी की गई है। टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट को लेकर कुछ नहीं किया गया है।

पंजाब प्लाइवुड मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक जुनेजा ने कहा कि बजट में 250 करोड़ की टर्नओवर वाले उद्योगों पर 25 फीसदी आयकर लगाने की बात की गई है, लेकिन यह प्रावधान कारपोरेट सेक्टर के लिए है। छोटे छोटे उद्यमियों को इसका फायदा नहीं मिलेगा। वहीं छोटे उद्योगों की संख्या 90 फीसदी से अधिक है। उनके हाथ खाली ही रहे हैं। इसके अलावा नौकरीपेशा लोगों को भी आयकर में किसी भी तरह की बड़ी छूट नहीं दी गई है।
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उद्योगों के लिए खराब रहा बजट 

budget 2018 - फोटो : पीटीआई
उद्योगों के लिए खराब रहा बजट 
इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान राम लुभाया ने भी बजट को उद्योगों के लिए खराब करार दिया है। लुभाया ने कहा कि पंजाब पोर्ट से दूरी पर है। कच्चे माल और तैयार माल पर भाड़ा लग रहा है।

पोर्ट से दूरी पर स्थित सीमावर्ती राज्यों को फ्रेट सब्सिडी का लाभ मिलना चाहिए था, लेकिन इससे वंचित रखा गया है। फास्टनर मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन आफ इंडिया के प्रधान नरेंद्र भमरा का भी मानना है कि बजट प्रावधानों ने निराश किया है। प्रत्यक्षकारों में एमएसएमई को कोई राहत नहीं दी गई है। इसके अलावा व्यक्तिगत को भी आयकर में किसी भी तरह की छूट नहीं मिली है।

उलटा टैक्स पर सेस एक फीसदी बढ़ा दिया गया है। वहीं सरकार का टैक्स 12.6 फीसदी और करदाताओं की संख्या 19.5 लाख तक बढ़ी है। भमरा ने कहा कि लगता है कि उद्योग धंधे बंद करके खेती करनी होगी।
 
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