फरवरी में वह दोबारा गर्भवती हो गई। इस बात का उसे कुछ पता नहीं चला। मई में जैसे उसे पता चला वह अपनी शिकायत लेकर एसएमओ सुधार के पास गई थी। पीड़िता के पति अजय कुमार के अनुसार स्वास्थ्य विभाग अधिकारी उन्हें गर्भपात करवाने की सलाह दे रहे है।
इसके एवज में 30 हजार रुपये देने की बात कही जा रही है। सेहत अधिकारी इस मामले के दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने की जगह लीपापोती कर रहे है।
इस मामले पर एसएमओ सुधार डॉक्टर नीना नाकरा का कहना है कि इस तरह के ऑपरेशन कई बार असफल हो जाते है। इनकी संख्या बड़ी कम होती है। पीड़िता की शिकायत उन्हें मिल चुकी है। कार्रवाई सिविल सर्जन दफ्तर की ओर से बनाई जाने वाली कमेटी कर सकती है। शिकायत को सिविल सर्जन दफ्तर भेज दिया गया है।
एमटीबी एक्ट के तहत दंपती की मंजूरी से 20 हफ्ते तक गर्भवती महिला का गर्भपात किया जा सकता है। जांच कमेटी अपनी रिपोर्ट तैयार कर डायरेक्टर हेल्थ के पास भेजेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार हर्जाने की रकम तय करेगी। - डॉ. एसपी सिंह, जिला परिवार भलाई अफसर