एक गांव अब दहशत में जी रहा है। लोगों के अंदर मौत का खौफ भर चुका है। इसकी वजह चार साल में 17 लोगों की मौत है। इन सभी लोगों की जान एक ही वजह से गई। शासन-प्रशासन में बैठे जिम्मेदार अभी नहीं जागे हैं। जबकि गांव के लोग मदद की गुहार लगा रहे हैं। उन्हें डर है अपनी जिंदगी और अपनों को खोने का। यह कहानी है पंजाब के पठानकोट के गांव भगवानसर की। यह गांव कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से बुरी तरह प्रभावित है।
एक तरफ जहां केंद्र और प्रदेश सरकार जनता को सेहत सुविधा देने के दावे कर रही हैं तो वहीं दूसरी तरफ ये गांव कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में है। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गांव के मौजूदा सरपंच भी कैंसर के कारण जान गंवा चुके हैं। उनके अलावा लगभग 17 लोग हैं जो चार वर्षों में इस गंभीर बीमारी से मौत का ग्रास बन गए।
गांव के पूर्व सरपंच ओंकार नाथ, पुरुषोत्तम लाल बिट्टू, चुन्नीलाल, मुन्ना, अजय कुमार, सुरेश कुमार, प्रेमचंद, मोनिका, प्रकाश चंदर, हंस राज, अमित कुमार, ललित मेहरा ने बताया कि गांव की आबादी 1500 के करीब है और 150 घर हैं। चार वर्षों में सूबेदार चमन लाल, मास्टर चमन लाल, प्रेमचंद, केवल कृष्ण, तृप्ता देवी, मदन लाल, सुनीता देवी, सुखदेव राज, सोहन लाल, दौलत राम, हरि राम, शिवराम, सुजीत, सतपाल, बोधराज और निशा अपनी जान गंवा चुके हैं। इससे ग्रामीणों में दहशत है।