केंद्र सरकार ने अपने हिस्से की राशि भेज दी है, जबकि पंजाब सरकार इस काम में देरी कर रही है। चौधरी के मुताबिक उन्हें पता चला है कि पंजाब सरकार उक्त टीचरों को शिक्षा विभाग के अधीन लाने की तैयारी में है। उक्त दोनों श्रेणी के टीचरों को करीब 42 से 47 हजार रुपये वेतन हर महीने मिलता है। जब वह एजुकेशन डिपार्टमेंट के अधीन आ जाएंगे, तो यह वेतन कम होकर दस हजार आठ सौ रह जाएगा। इसी बात को लेकर पूरे पंजाब में संघर्ष चल रहा है। ऐसे में सरकार इस संबंध में कोई फैसला नहीं ले पाई है। उन्होंने मांग की है कि सरकार तुरंत इस तरफ ध्यान दे।
जानकारी के मुताबिक एसएसए और रमसा टीचर 10 साल से स्कूलों में रेगुलर टीचरों की तरह पढ़ा रहे हैं। हालांकि यह कांट्रेक्ट पर काम करते हैं। अप्रैल के पहले हफ्ते में इनके कांट्रेक्ट रिन्यू होते हैं। एसएसए के तहत टीचर ही आते है, जबकि रमसा में लैब अटेंडेंट, मास्टर व हेड मास्टर स्कूल में काम कर रहे हैं। जो बढ़िया तरीके से स्कूलों को चला रहे हैं।
त्योहारों के मौसम में ज्यादा बढ़ती है समस्या
एसएसए और रमसा टीचरों का कहना है कि पहले भी कई बार ऐसे मौके आए, जब उन्हें इस तरह की परेशानी उठानी पड़ी है। उन्होंने बताया दो साल पहले भी इस तरह की समस्या आई थी। वहीं, नई सरकार से उन्हें ज्यादा उम्मीद थी, लेकिन इस बार भी निराशा हाथ लगी है।