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छह महीने से महिला टीचर को नहीं मिला वेतन, ट्वीट करके सलमान खान से मांगी मदद, बोली...

Tue, 02 Oct 2018 02:16 AM IST
अमित शर्मा, अमर उजाला, मोहाली (पंजाब)
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salman khan - फोटो : फाइल फोटो
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वेतन न मिलने से परेशान एक टीचर ने बॉलीवुड स्टार सलमान खान से मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने ट्वीट के जरिए अपनी पूरी व्यथा साझा की। दरअसल, पंजाब शिक्षा विभाग में तैनात एसएसए व रमसा टीचरों को छह महीने से वेतन नहीं मिला है। इसका खामियाजा टीचरों और उनके परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। टीचर उधार लेकर अपने परिवार पाल रहे हैं। कई टीचरों के बच्चों की पढ़ाई भी इस चक्कर में प्रभावित होना शुरू हो गई है। इससे परेशान चल रही एक टीचर ने अब बॉलीवुड स्टार सलमान खान से मदद की गुहार लगाई है। टीचर पंजाब के मोहाली की रहने वाली है।

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टीचर ने ट्विटर के जरिए सलमान खान से मदद मांगी है। टीचर का कहना है कि उन्हें छह महीने से वेतन नहीं मिल पाया है, जबकि उनका बेटा विदेश में उच्च स्तरीय पढ़ाई करने के लिए गया है। इस समय बेटे की फीस भरनी है। फीस भी उनके लिए मुसीबत बनी हुई है। उनके बच्चे की पढ़ाई प्रभावित न हो। ऐसे में उनकी सहायता की जाए। 

पंजाब में एसएसए और रमसा टीचरों की कुल संख्या करीब 8696 है। एसएसए टीचरों को जहां चार महीने से सैलरी नहीं मिली, वहीं रमसा टीचर छह महीने से वेतन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। एसएसए व रमसा टीचर यूनियन के सूबा कन्वीनर रामभजन चौधरी ने बताया कि रमसा व एसएसए टीचरों की सैलरी पंजाब सरकार व केंद्र सरकार द्वारा मिलकर दी जाती है।

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अप्रैल में होता है कांट्रेक्ट रिन्यू 

Salary - फोटो : फाइल फोटो
 केंद्र सरकार ने अपने हिस्से की राशि भेज दी है, जबकि पंजाब सरकार इस काम में देरी कर रही है। चौधरी के मुताबिक उन्हें पता चला है कि पंजाब सरकार उक्त टीचरों को शिक्षा विभाग के अधीन लाने की तैयारी में है। उक्त दोनों श्रेणी के टीचरों को करीब 42 से 47 हजार रुपये वेतन हर महीने मिलता है। जब वह एजुकेशन डिपार्टमेंट के अधीन आ जाएंगे, तो यह वेतन कम होकर दस हजार आठ सौ रह जाएगा। इसी बात को लेकर पूरे पंजाब में संघर्ष चल रहा है। ऐसे में सरकार इस संबंध में कोई फैसला नहीं ले पाई है। उन्होंने मांग की है कि सरकार तुरंत इस तरफ ध्यान दे।

जानकारी के मुताबिक एसएसए और रमसा टीचर 10 साल से स्कूलों में रेगुलर टीचरों की तरह पढ़ा रहे हैं। हालांकि यह कांट्रेक्ट पर काम करते हैं। अप्रैल के पहले हफ्ते में इनके कांट्रेक्ट रिन्यू होते हैं। एसएसए के तहत टीचर ही आते है, जबकि रमसा में लैब अटेंडेंट, मास्टर व हेड मास्टर स्कूल में काम कर रहे हैं। जो बढ़िया तरीके से स्कूलों को चला रहे हैं। 

त्योहारों के मौसम में ज्यादा बढ़ती है समस्या 
एसएसए और रमसा टीचरों का कहना है कि पहले भी कई बार ऐसे मौके आए, जब उन्हें इस तरह की परेशानी उठानी पड़ी है। उन्होंने बताया दो साल पहले भी इस तरह की समस्या आई थी। वहीं, नई सरकार से उन्हें ज्यादा उम्मीद थी, लेकिन इस बार भी निराशा हाथ लगी है।
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