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Chandigarh News: विश्व हृदय दिवस पर खास बढ़ती उम्र को हल्के में न लें, दिल की मरम्मत करने वाली कोशिकाएं भी होती हैं कमजोर

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चंडीगढ़। उम्र बढ़ने के साथ शरीर के दूसरे अंगों की तरह दिल की खुद को ठीक करने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। पीजीआई के शोध में सामने आया है कि उम्रदराज लोगों के दिल में मौजूद कार्डियक प्रोजेनिटर कोशिकाएं, जो क्षतिग्रस्त हृदय कोशिकाओं की मरम्मत में मदद करती हैं, उम्र के साथ कमजोर और निष्क्रिय होने लगती हैं। इसका असर भविष्य में कोशिकाओं के जरिये दिल की बीमारी के इलाज की संभावनाओं पर भी पड़ सकता है।
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शोधकर्ताओं ने ओपन हार्ट सर्जरी के दौरान मरीजों के दिल के दाहिने ऊपरी हिस्से से लिए गए ऊतक से इन कोशिकाओं को अलग कर अध्ययन किया। इसमें 30 साल से कम उम्र के 10 और 60 साल से अधिक उम्र के 10 मरीजों की कोशिकाओं की तुलना की गई। जांच में बुजुर्ग मरीजों से मिली कार्डियक प्रोजेनिटर कोशिकाओं में नई कोशिकाएं बनाने और तेजी से बढ़ने की क्षमता कम मिली। पीजीआई के एनाटॉमी व कार्डियोवस्कुलर एंड थोरेसिक सर्जरी विभाग की शोधकर्ता डॉ रिचा गुप्ता और डॉ अंजलि अग्रवाल के साथ ही डॉ अपर्णा जोशी और डॉ आनंद मिश्रा भी शामिल हैं। यह शोध जुलाई 2026 में क्लिनिकल एनाटॉमी जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
80 फीसदी में कार्डियक प्रोजेनिटर कोशिकाएं निष्क्रिय
शोध के अनुसार, उम्रदराज समूह में करीब 80 फीसदी कार्डियक प्रोजेनिटर कोशिकाएं निष्क्रिय अवस्था में थीं। यानी ये कोशिकाएं सक्रिय रूप से बढ़ने या विभाजित होने के बजाय एक तरह से रुकी हुई थीं। इन कोशिकाओं का आकार भी बढ़ा हुआ और उनकी संरचना में बदलाव पाया गया। इसके मुकाबले कम उम्र के लोगों में ये कोशिकाएं ज्यादा सक्रिय थीं और नई कोशिकाएं बनाने की क्षमता बेहतर थी।
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कोशिकाओं में भी कोशिकीय बुढ़ापा
शोधकर्ताओं ने पाया कि उम्र बढ़ने के साथ इन कोशिकाओं में कोशिकीय बुढ़ापा बढ़ता है। ऐसी कोशिकाएं खुद ठीक से काम नहीं कर पातीं और आसपास की कोशिकाओं के माहौल को भी प्रभावित कर सकती हैं। बुजुर्ग समूह की कोशिकाओं से कुछ ऐसे पदार्थ अधिक मात्रा में निकलते मिले, जो आसपास की कोशिकाओं के कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह शोध यह समझने में मदद करता है कि उम्रदराज मरीजों में शरीर की अपनी कार्डियक प्रोजेनिटर कोशिकाओं की मरम्मत क्षमता क्यों कम हो सकती है। भविष्य में सेल आधारित हृदय उपचार विकसित करते समय मरीज की उम्र और इन कोशिकाओं की गुणवत्ता को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, यह प्रयोगशाला स्तर का अध्ययन है और इसके आधार पर मरीजों के इलाज में तत्काल बदलाव की सलाह नहीं दी गई है।

दिल को स्वस्थ रखने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता लेकिन दिल को स्वस्थ रखने के लिए रोजमर्रा की आदतों में सुधार किया जा सकता है। नियमित शारीरिक गतिविधि करें और लंबे समय तक बैठे रहने से बचें। खाने में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और संतुलित आहार को प्राथमिकता दें और बहुत ज्यादा नमक, चीनी व तले-भुने भोजन से बचें। धूम्रपान न करें और शराब से दूरी रखना बेहतर है।
इसे भी समझें
इसके अलावा वजन, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रण में रखना जरूरी है। उम्र बढ़ने के साथ इनकी समय-समय पर जांच कराते रहें। पर्याप्त नींद लें और तनाव को नियंत्रित रखने की कोशिश करें। सीने में दर्द, सांस फूलना, असामान्य थकान या धड़कन में लगातार बदलाव महसूस हो तो इसे सामान्य कमजोरी मानकर नजरअंदाज न करें और डॉक्टर से जांच कराएं।
क्या होती हैं कार्डियक प्रोजेनिटर कोशिकाएं
कार्डियक प्रोजेनिटर कोशिकाएं दिल में पाई जाने वाली ऐसी कोशिकाएं हैं जिनमें कुछ परिस्थितियों में नई हृदय कोशिकाएं बनाने और क्षतिग्रस्त ऊतक की मरम्मत में योगदान देने की क्षमता मानी जाती है। इस वजह से इन पर सेल आधारित हृदय उपचार के लिए शोध किया जा रहा है। अध्ययन में पाया गया कि उम्र बढ़ने के साथ इनकी संख्या और सक्रियता दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
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