भवनों की सुरक्षा व्यवस्था का संयुक्त निरीक्षण करना चाहिए
प्रशासन, नगर निगम और अग्निशमन विभाग को इन भवनों की सुरक्षा व्यवस्था का संयुक्त निरीक्षण करना चाहिए। विशेष रूप से यह जांचने की जरूरत है कि कोचिंग सेंटरों में अग्नि सुरक्षा मानकों, आपात निकासी योजना और वैकल्पिक निकासी द्वार संबंधी नियमों का पालन हो रहा है या नहीं। चंडीगढ़ के कई सेक्टरों के बेसमेंट में निकलने का रास्ता एक ही है।
करीब डेढ़ सौ होटल चल रहे हैं एससीओ और एससीएफ में
चंडीगढ़ में एससीओ और एससीएफ इमारतों में बने छोटे व बजट होटलों या गेस्ट हाउस की लगभग 150 के बीच है। इनमें से ज्यादातर होटल तीसरी और दूसरी मंजिल में चल रहे हैं जिसमें से निकलने का रास्ता सिर्फ एक ही होता है। हालांकि आग से बचाव का होटलों द्वारा पूरा इंतजाम किया गया है पर आपात स्थिति में इनमें परेशानी हो सकी है।
क्या कहते हैं सुरक्षा मानक
प्रवेश और निकास द्वार
किसी भी व्यावसायिक या बहुमंजिला भवन में सीढ़ियों और आपातकालीन निकास द्वारों की चौड़ाई पर्याप्त होनी चाहिए, ताकि आपदा के समय लोग बिना बाधा तेजी से बाहर निकल सकें। बेसमेंट के लिए कम से कम 4 मीटर चौड़े अलग प्रवेश और निकास रैंप की व्यवस्था जरूरी मानी जाती है।
अग्निशमन यंत्र
इमारत के प्रत्येक फ्लोर और संवेदनशील स्थानों पर निर्धारित क्षमता के पोर्टेबल अग्निशमन यंत्र स्थापित होना अनिवार्य है। इनके नियमित निरीक्षण और समय-समय पर रिफिलिंग की भी व्यवस्था होनी चाहिए।
फायर होज रील और स्प्रिंकलर सिस्टम
बड़ी और बहुमंजिला व्यावसायिक इमारतों में स्वचालित स्प्रिंकलर सिस्टम तथा फायर होज रील पाइप नेटवर्क होना आवश्यक है, ताकि आग लगने की स्थिति में शुरुआती स्तर पर ही उसे नियंत्रित किया जा सके।
फायर अलार्म और डिटेक्शन सिस्टम
धुआं और तापमान बढ़ने का पता लगाने वाले स्मोक डिटेक्टर, हीट सेंसर, हूटर और फायर अलार्म सिस्टम हमेशा चालू हालत में होने चाहिए। आपात स्थिति में यही सिस्टम लोगों को समय रहते सतर्क करते हैं।
पानी का टैंक और फायर पंप
आग बुझाने के लिए भवन परिसर या छत पर निर्धारित क्षमता के अंडरग्राउंड अथवा ओवरहेड पानी के टैंक के साथ फायर पंप की व्यवस्था अनिवार्य है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
चंडीगढ़ में लगातार बिल्डिंगों की जांच की जाती है। कई बिल्डिंगों को नोटिस दिया जा चुका है। हमारा प्रयास रहता है कि कहीं कोई घटना न हो। -डॉ. इंद्रजीत, चीफ फायर ऑफिसर, चंडीगढ़
चंडीगढ़ की 15 मीटर से ऊपर ही कई बिल्डिंगों में एक्जिट का रास्ता नहीं है। इसमें यह होना आवश्यक है। इसके लिए प्रशासन ही इजाजत दे सकता है। -चरंजीव सिंह, चेयरमैन, चंडीगढ़ व्यापार मंडल
चंडीगढ़ के कई सेक्टरों की बिल्डिंगों में आने-जाने के दो रास्ते हैं पर कई सेक्टरों में ऐसा नहीं है। व्यापारी अपने आप कुछ भी नहीं कर सकते हैं, इसमें प्रशासन को ही रास्ता निकालना पड़ेगा। -संजीव चड्ढा, अध्यक्ष, चंडीगढ़ व्यापार मंडल