पंजाब के विधायकों के आयकर का भुगतान पंजाब सरकार द्वारा किए जाने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। याची ने कहा कि पंजाब सरकार के पास कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पैसा नहीं है, लेकिन विधायकों का आयकर भरने को तैयार है। हाईकोर्ट ने अब याची को अगली सुनवाई पर इस बहस के लिए तैयार रहने को कहा है कि क्या सरकार को ऐसा प्रावधान करने का अधिकार है या नहीं।
एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट के समक्ष विधायकों के आयकर का भुगतान सरकार द्वारा किए जाने के निर्णय को चुनौती दी है। याची ने हाईकोर्ट को बताया कि पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत बादल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा था कि पंजाब की वित्तीय स्थिति बिगड़ चुकी है और सरकार के पास कर्मचारियों को देने के लिए वेतन की राशि तक पूरी नहीं है।
यह पत्र कई समाचार पत्रों की सुर्खियां बना था। याची ने कहा कि एक ओर इस प्रकार की वित्तीय स्थिति में पंजाब पहुंच चुका है और दूसरी ओर विधायकों के वेतन-भत्तों पर आयकर भुगतान में छूट देने का निर्णय लिया जा रहा है। इससे सारा बोझ सरकार पर पड़ेगा और आम आदमी के खून पसीने की कमाई से ऐसा करना गलत है।
हाईकोर्ट ने याची से पूछा कि इससे आप कैसे प्रभावित होते हैं। इस पर याची ने कहा कि वह खुद आयकर भुगतान करता है जो प्रत्येक वर्ष करीब 10 लाख रुपये होता है। एक अनुमान के अनुसार आयकर का भुगतान करने से सरकार को हर साल करीब 11 करोड़ रुपये का वित्तीय भार सहन करना होगा। हाईकोर्ट ने अब याचिका पर सुनवाई स्थगित करते हुए अगली सुनवाई पर इस बात पर बहस के आदेश दिए हैं कि क्या विधानसभा को यह अधिकार है कि वह ऐसे आदेश जारी कर सके ।