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चंडीगढ़ः पुरुषों के अधिकारों के लिए लड़ता है एक संगठन, उपलब्ध कराते हैं हर संभव कानूनी मदद

Tue, 23 Oct 2018 04:10 PM IST
राजन सैनी, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सेव इंडिया फैमिली की मीटिंग
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महिलाओं के अधिकारों के लिए तो ढेर सारे संगठन काम करते हैं। बहुत से आयोग भी हैं, मगर बहुत कम ऐसी एजेंसी या संगठन हैं, जो पुरुषों के उत्पीड़न में उनके साथ डटकर खड़े रहते हैं। ऐसा ही एक संगठन चंडीगढ़ में है, जो सिर्फ पुरुषों के अधिकारों की बात करता है। इस संगठन का नाम ‘सेव इंडिया फैमिली’ है, जिसकी नींव साल 2009 में पड़ी थी। संगठन का मुख्य काम उन पुरुषों को कानूनी मदद उपलब्ध कराना है, जो दुष्कर्म, वर्क प्लेस पर उत्पीड़न, घरेलू विवाद और दहेज लेने के आरोपों से पीड़ित होते हैं। सेव इंडिया फैमिली के सदस्य रोहित डोगरा ने बताया कि हर महीने उनके पास 250 से 300 नए केस आते हैं। हर केस को ध्यान से सुना और फिर समझा जाता है। इसके बाद पीड़ित सदस्य को समाधान बताया जाता है। रोहित पेशे से वकील हैं इसलिए वह अदालतों में वकीलों के दाव-पेच से अच्छी तरह से वाकिफ हैं।
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मदद के एवज में नहीं लेते पैसे
सेव इंडिया फैमिली का मकसद है कि महिला और पुरुषों के अधिकार और न्याय एक समान हों। एडवोकेट और संगठन के सदस्य मनिंदर ने बताया कि पीड़ित पुरुषों के मदद के एवज में संगठन एक भी रुपया नहीं लेता है। उन्हें मुफ्त कानूनी सेवाएं प्रदान करता है। उनके मुताबिक चंडीगढ़ में उनके एक हजार सदस्य हैं, जो 24 घंटे मदद के लिए तैयार रहते हैं। हर साल उनके पास 3500 पुरुषों के ऐसे फोन कॉल्स आते हैं, जो पत्नी व महिलाओं से पीड़ित होते हैं। उनका मानना है कि देश के महिला संगठनों की एक सोच है कि महिला-पुरुषों के बीच विवाद में गलती पुरुष की होगी। दहेज प्रथा हो या वर्क प्लेस में उत्पीड़न का मामला हो। अदालत के नतीजे से पहले मीडिया व अन्य संगठन पुरुष को ही दोषी ठहरा देते हैं। पुरुषों के पक्ष में बोलने के लिए कोई नहीं खड़ा होता। इसी सोच के आधार पर यह संगठन खड़ा किया गया है।

रविवार को शांतिकुंज में करते हैं मीटिंग
मनिंदर के मुताबिक एनसीआरबी के वर्ष 2016 के आंकड़े कहते हैं कि पुरुषों पर दुष्कर्म के 76 फीसदी और धारा 498 ए के 88 फीसदी मामले झूठे पाए गए हैं। दहेज मांगने और स्त्रियों से मारपीट के मामले भी अधिकतर झूठे निकलते हैं। ऐसे पीड़ितों की मदद के लिए संगठन हर रविवार को शांतिकुंज में मीटिंग करते हैं। संगठन का एक संपर्क नंबर 8882498498 है, इस पर काल करने से लीगल एडवाइज ले सकते हैं। इससे उन्हें अपना केस लड़ने और समझने में मदद मिलती है।  
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कुछ ने सुनाई आपबीती
केस 1 : तलाक के बाद समझौते के एवज में देने पड़े दस लाख
पीड़ित राजीव (काल्पनिक नाम) के मुताबिक वह पेशे से इंजीनियर हैं और उनकी शादी साल 2013 में हुई थी। छोटे-छोटे विवादों में पत्नी थाने पहुंच जाती थी। बाद में शिकायत दर्ज करवा दी कि शराब पीकर मैं उसको मारता-पीटता हूं। विवाद अदालत तक पहुंचा। तलाक के बाद पत्नी को 10 लाख रुपये देने पड़े। इसके लिए अपना घर तक बेचना पड़ा। झूठे आरोप तो एक पर लगते हैं लेकिन उसकी वजह से पूरा परिवार टूट जाता है। आरोप लगने की वजह से समाज में छवि भी खराब हुई। मेरी नौकरी तक छूट गई। करीब एक साल तक बिना नौकरी के रहा। इस मामले में सेव इंडिया फैमिली ने बहुत मदद की।

केस 2 : पीड़ित रमेश (काल्पनिक नाम) के मुताबिक उनकी शादी अक्तूबर 2015 में हुई थी। शादी के कुछ दिनों बाद पत्नी ने दहेज के लिए मारपीट का आरोप लगा दिया। एफआईआर के बाद गिरफ्तार हुआ और जेल में रहा। इससे मेरी सरकारी नौकरी चली गई। पत्नी ने मुआवजे के तौर पर 25 लाख मांगे हैं। इससे  डिप्रेशन में आ गया लेकिन ट्रस्ट ने मुझे मोटिवेट किया, जिसकी वजह से डिप्रेशन से बाहर आ सका। अब हर रविवार को ट्रस्ट की ओर से शांतिकुंज पार्क में होने वाली मीटिंग में भाग लेता हूं।
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