चंडीगढ़। हर साल 22 मई को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस इस बार ‘जैव विविधता के मुद्दों के प्रति जागरूकता’ की थीम पर केंद्रित है। चंडीगढ़ एक प्रेरणास्रोत बनकर उभर रहा है, जहां प्रशासन और आम नागरिक मिलकर जैव विविधता को संरक्षित करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
चंडीगढ़ न केवल खूबसूरत हरियाली के लिए प्रसिद्ध है बल्कि जैव विविधता को बचाने और लोगों को जागरूक करने के लिए चलाए जा रहे प्रयास भी काबिलेतारीफ हैं। शहर के प्रमुख हरित क्षेत्र जैसे कि सुखना लेक, बर्ड सेंचुरी, बटरफ्लाई पार्क और कैक्टस गार्डन जैव विविधता के संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। इन स्थलों पर विभिन्न प्रकार के पौधे, पक्षी और तितलियों की प्रजातियां पाई जाती हैं जो शहर के इको सिस्टम को संतुलित बनाए रखने में मदद करती हैं। एक स्टडी के अनुसार चंडीगढ़ में वर्तमान में लगभग 422 पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं। इसमें स्थायी और प्रवासी दोनों प्रकार की प्रजातियां शामिल हैं। इनमें से कई प्रजातियां संकटग्रस्त या दुर्लभ भी हैं और सैकड़ों पेड़-पौधों की प्रजातियां पाई जाती हैं। ये जैव विविधता जलवायु परिवर्तन से निपटने, मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने और मानव स्वास्थ्य में अहम भूमिका निभाती है।
जैव विविधता को दिखाने के लिए बनेगा नया नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर
सारंगपुर स्थित बॉटनिकल गार्डन में जल्द ही एक नया ‘नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर’ स्थापित किया जाएगा, जो क्षेत्र की जैव विविधता को दर्शाएगा। वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि केंद्र में विभिन्न आईटी उपकरणों का उपयोग किया जाएगा ताकि यह एक इंटरैक्टिव और इमर्सिव अनुभव बने। केंद्र में इनडोर और आउटडोर दोनों तरह की प्रदर्शनियों की व्यवस्था होगी। थ्री मॉडल, म्यूरल्स, 2डी-3डी प्रेजेंटेशन और थीम-आधारित मीडिया मैट्रिक्स के माध्यम से क्षेत्र की जैव विविधता को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया जाएगा। यहां विभिन्न जलवायु क्षेत्रों जैसे कि जंगल और रेगिस्तान का भी लैंडस्केप अनुभव उपलब्ध कराया जाएगा।
चंडीगढ़ में पहले से दो केंद्र मौजूद
चंडीगढ़ में दो नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर्स हैं। एक सुखना झील के रेगुलेटरी एंड पर और दूसरा कांसल फॉरेस्ट में है, जो सुखना वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी के अंतर्गत आता है। सुखना लेक केंद्र में पक्षियों और जानवरों से संबंधित दो सेक्शन हैं। यहां एक की-बोर्ड के माध्यम से किसी भी पक्षी की आवाज और फोटो को प्रदर्शित किया जाता है। कांसल फॉरेस्ट केंद्र मुख्य रूप से सुखना वाइल्ड लाइफ सैंक्चुरी पर आधारित है। बॉटनिकल गार्डन में बनने वाला यह नया केंद्र इन दोनों केंद्रों से बड़ा और अलग होगा। इसमें चंडीगढ़ के पर्यावरण, सुखना वाइल्ड लाइफ सैंक्चुरी, बॉटनिकल गार्डन, सुखना कैचमेंट एरिया, और यहां पाए जाने वाले स्थानीय व प्रवासी पक्षियों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।
आज सेक्टर-21 के बर्ड सेंचुरी में कार्यक्रम
शहर के कई गैर-सरकारी संगठन जैव विविधता के संरक्षण के लिए स्कूलों और कॉलोनियों में जागरूकता अभियान चला रहे हैं। एन्वायरमेंट सोसाइटी ऑफ इंडिया (चंडीगढ़) के सचिव एनके झिंगन ने बताया कि उनकी तरफ से भी वीरवार को सेक्टर-21 के बर्ड सेंचुरी में कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें स्कूली छात्रों को विभिन्न पक्षियों की प्रजातियों के बारे में बताया जाएगा।