चंडीगढ़। देश में 7 अगस्त को मनाए जा रहे भाला फेंक दिवस के मौके पर पंचकूला का ताऊ देवी लाल स्टेडियम एक बार फिर चर्चा में है। यही वह मैदान है, जहां हरियाणा के स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा ने अपने खेल को नई दिशा दी और लगातार अभ्यास के दम पर विश्व पटल पर भारत का नाम रोशन किया। हाल ही में शानदार प्रदर्शन कर नीरज ने एक बार फिर देश का सिर गर्व से ऊंचा किया है।
ताऊ देवी लाल स्टेडियम में प्रशिक्षण के दौरान नीरज ने अपने खेल की बुनियाद मजबूत की। यहां उन्होंने अनुभवी कोच वसीम अहमद से भाला फेंक की बारीकियां सीखीं। कोच ने उनकी तकनीक, रन-अप, संतुलन और फिटनेस पर विशेष ध्यान दिया। इसके बाद नीरज ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार भारत को पदक दिलाकर विश्व के शीर्ष भाला फेंक खिलाड़ियों में अपनी जगह बनाई।
कोच वसीम अहमद का कहना है कि नीरज की सबसे बड़ी ताकत उनकी मेहनत और सीखने की ललक रही। वह अभ्यास के दौरान हर छोटी-छोटी तकनीकी गलती पर काम करते थे और हर दिन खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करते थे। यही समर्पण उन्हें विश्व चैंपियन और ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता बनाने में सबसे बड़ी वजह बना।
उन्होंने कहा कि नीरज की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि देशभर के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है। पंचकूला के इस स्टेडियम से निकलकर उन्होंने साबित किया कि यदि प्रतिभा को सही मार्गदर्शन और मेहनत का साथ मिले तो विश्व की सबसे बड़ी प्रतियोगिताओं में भी तिरंगा लहराया जा सकता है।
नीरज की उपलब्धियां
- इसी महीने की शुरूआत में राष्ट्रमंडल खेल ग्लास्गो में जेवलियन थ्रो स्पर्धा में इस सीजन का बेस्ट थ्रो किया और कांस्य पदक जीता।
- टोक्यो ओलंपिक 2020 में 87.58 मीटर थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीत कर इतिहास रच चुके हैं।
-पेरिस ओलंपिक 2024 में रजत पदक हासिल कर चुके हैं।
- वर्ष 2022 में भाला फें डायमंड ट्रॉफी जीती।
-वर्ष 2016 में भाला फेंक में भारतीय राष्ट्रीय रिकार्ड धारक है
नीरज शुरू से ही बेहद अनुशासित और मेहनती खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने कभी अभ्यास से समझौता नहीं किया। आज उनकी उपलब्धियां हर युवा खिलाड़ी को यह संदेश देती हैं कि लगन और सही प्रशिक्षण से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। -वसीम अहमद, कोच, ताऊ देवी लाल स्टेडियम, पंचकूला