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Chandigarh News: 96% नवजातों को डिलीवरी टेबल पर मिल रहा मां का दूध

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चंडीगढ़। स्वास्थ्य विभाग के मिल्क मार्शल प्रोजेक्ट का असर दिखने लगा है। महज एक साल में जन्म के एक घंटे के अंदर नवजात को दूध पिलाने की दर 50 से बढ़कर 96 प्रतिशत पर आ गई है। जीएमएसएच 16 के साथ अन्य सिविल अस्पतालों में से ही मिल्क मार्शल बनाए गए हैं, जो वहां की सीनियर नर्सिंग ऑफिसर हैं। वे हर शिफ्ट में होने वाली डिलीवरी के दौरान यह सुनिश्चित करती हैं कि प्रसव के एक घंटे के अंदर मां नवजात को अपना पहला पौष्टिक दूध पिलाए। ये बातें जीएमएसएच 16 की प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक व बाल रोग विभाग की प्रमुख डॉ. सद्भावना पंडित ने बुधवार को राष्ट्रीय नवजात शिशु सप्ताह के शुभारंभ के दौरान आयोजित कार्यक्रम में कहीं।
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अस्पताल की बाल रोग विभाग की ओपीडी में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. सद्भावना ने बताया कि जो चार से पांच प्रतिशत नवजात जन्म के बाद किसी न किसी समस्या से ग्रस्त होते हैं, उन्हें नर्सरी में शिफ्ट करना पड़ता है, जिसकी वजह से वे मां के दूध से वंचित रह गए हैं। 96 के आंकड़े को 100 प्रतिशत पर पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए ही जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से नवजात शिशु मृत्यु दर पर काबू पाने का प्रयास हो रहा है। डॉ. सद्भावना ने बताया कि 2013 में चंडीगढ़ में नवजात शिशु मृत्यु दर 31 थी, जो 2023 पर 8 पर आ गई है। इस दौरान निदेशक स्वास्थ्य डॉ. सुमन सिंह ने प्रसव के बाद पहले एक घंटे में नवजात को स्तनपान करने वाली 10 माताओं को सम्मानित किया। वहीं, नर्सिंग की छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बाल रोग विभाग की ओपीडी में आई महिलाओं को नवजात की सुरक्षा से जुड़ी जानकारी देने का प्रयास किया।
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माताएं इसका रखें ध्यान

- गर्भावस्था के दौरान कम से कम पांच एंटीनेटल चेकअप जरूर कराएं

- सुनिश्चित करें की डिलीवरी अस्पताल में हो
- जन्म के बाद बच्चे को 6 महीने तक सिर्फ मां का दूध दें

- बच्चों को घुट्टी, अजवाइन का पानी और शहद जैसी चीज न दें। इससे उसे पेट सव खून संबंधित संक्रमण हो सकता है।

- बच्चों को छूने से पहले हर बार हाथ धोएं
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