अमिया घोष और उनके बेटे सम्राट घोष ने छह दिन में कोरोना को मात दी।
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रक्षा मंत्रालय से फाइनेंशियल एडवाइजर के पद से सेवानिवृत्त 83 वर्षीय कैंसर और मधुमेह से पीड़ित बुजुर्ग अमिया कुमार घोष और उनके बेटे वैज्ञानिक सम्राट घोष कोरोना को हराकर घर लौटे हैं। उनका कहना है कि यह जंग उन्होंने दवाइयों, नियमित मास्क पहनने और सकारात्मक सोच से जीती है। उनका मानना है कि कोरोना एक सामान्य फ्लू की तरह ही होता है, लेकिन इसके बढ़ने से यह घातक सिद्ध हो सकता है। इसलिए इससे बचने के लिए कोरोना गाइडलाइन का पालन करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि होम आइसोलेशन में रहकर भी व्यक्ति अगर दवाइयों, खुराक और साफ-सफाई का ध्यान रखे तो इसे हराया जा सकता है।
डॉ. सम्राट घोष ने बताया कि वह खुद 53 साल के हैं, जबकि उनके पिता बुजुर्ग होने के साथ ही गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। ऐसे में हम दोनों शुरू से ही कोरोना बीमारी को लेकर काफी गंभीर थे। हम नियमित देश-विदेश में बढ़ रहे कोरोना के मामलों और उनकी स्थिति पर नजर रखते थे। इतना ही नहीं इस संक्रमण को मात देने के लिए वह हर संभव तरीका अपना रहे थे। हम दोनों ने एक नामी निजी अस्पताल में जाकर कोरोना वैक्सीन की पहली डोज ले ली थी। इसी बीच 10 अप्रैल को उनके पिता और उनकी खुद की तबीयत खराब होने लगी।
बुखार 102 से नीचे नहीं आ रहा था। शरीर में काफी दर्द था, रात को बिल्कुल नींद नहीं आ रही थी, नाक लगातार बह रहा था। उन्हें अहसास हो गया था कि वह कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। अगले ही दिन पिता और अपनी कोरोना जांच करवाई। डॉ. सम्राट ने कहा कि सुबह पिताजी की और शाम को उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई थी। इसके बाद दोनों दिल्ली के एक निजी अस्पताल में भर्ती हो गए। इसके साथ ही कोरोना गाइडलाइन का पालन, साफ-सफाई रखने, अच्छी डाइट लेने और समय पर दवा लेने, चीजों को छूने के बाद सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने के साथ उचित देखभाल करने की वजह से वह 6 दिनों में फिट होकर घर लौट आए।
कोविड वार्ड में मरीज बने एक दूसरे का सहारा
साइंटिस्ट डॉ. सम्राट घोष और उनके पिता अमिया कुमार घोष ने बताया कि जब वह अस्पताल पहुंच गए, तो भगवान के आशीर्वाद से बैड मिल गया। हालांकि कोविड अस्पताल में मरीज अधिक और अटेंडेंट कम पड़ रहे थे। वहां भर्ती हर मरीज को दवाई देने और अन्य चीजें देने में उन्हें दिक्कत आ रही थी। वहीं, कोविड वार्ड में भर्ती कई लोग जिंदगी की जंग हार रहे थे। ऐसे में वार्ड में भर्ती सभी मरीज एक दूसरे के लिए प्रेरणादायक बने हुए थे। हालात यह थे कि जब किसी की हालत ज्यादा बिगड़ती थी तो अन्य दूसरे सोच में पड़ जाते थे कि उनके साथ क्या होगा। इस दौरान कई तरह के विचार वार्ड में भर्ती लोगों के दिमाग में चल रहे थे।
कोरोना से जीतने के लिए यह जरूरी
कोरोना को हराकर ठीक हो चुके रक्षा मंत्रालय में फाइनेंशियल एडवाइजर पद से सेवानिवृत्त 83 वर्षीय अमिया कुमार घोष ने बताया कि कोरोना से निटपने के लिए सबसे पहले जरूरी है कि अपनी डाइट पर पूरा ध्यान दें और ज्यादा देर तक खाली पेट न रहें। जहां तक हो सके ऐसा खाना खाएं जो जल्दी ही पच जाए और उससे हमारे शरीर को एनर्जी मिले। ऐसे में दलिया, उबला हुआ खाना, दूध और अंडा भी ले सकते हैं। इसके साथ ही जहां तक हो सके अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए। इसके साथ ही मास्क पहनना और सामाजिक दूरी बनाए रखना बहुत जरूरी है। घर से बाहर कहीं भी आने-जाने के बाद हाथों को सैनिटाइजर से साफ जरूर करें। घर में हैं तो साबुन से अच्छी तरह हाथों को धोएं।
कैंसर और मधुमेह से पीड़ित अमिया कुमार घोष ने कहा कि जिन्हें रक्तचाप है या मधुमेह से पीड़ित हैं तो उन्हें साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सांस लेने की प्रक्रिया को मजबूत बनाए रखने के लिए प्राणायाम और अन्य योग शरीर की क्षमता के अनुसार जरूर करने चाहिए। जरा भी लक्षण दिखने पर कोरोना टेस्ट तुरंत करवाना चाहिए।