अपने बेटे बलविंदर सिंह की फोटो हाथों में लिए लखबीर कौर।
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पंजाब डाक्यूमेंटेशन एंड एडवोकेसी प्रोजेक्ट (पीडीएपी) नामक गैर सरकारी संस्था ने सात साल लंबी खोजबीन के बाद पंजाब में 1980 से 1995 के दौरान लापता हुए युवा, झूठे पुलिस मुकाबले, पुलिस द्वारा घरों से उठा लिए गए लोग जो आज तक घर नहीं लौटे, का जिलेवार ब्योरा तैयार किया है।
संस्था की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि आतंकवाद के दौर की उक्त अवधि के दौरान 8257 मामलों में गुम हुए लोगों का आजतक पता नहीं चला है। संस्था ने सूबे से 22 जिलों में पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा योजनाबद्ध तरीके से युवाओं को घरों से उठाकर उनके एनकाउंटर करने और शवों को सामूहिक तौर पर जला दिए जाने के आरोप लगाए हैं। संस्था की ओर से यह भी दावा किया गया है कि उसकी खोजबीन में जो तथ्य सामने आए हैं, उन्हें जल्द ही याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा जाएगा और पूरी मामले की सीबीआई जांच की मांग की जाएगी।
शनिवार को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में उक्त संस्था के पदाधिकारियों के अलावा भारी संख्या में वे लोग उपस्थित थे, जिनके परिजनों को आतंकवाद के दौरान पुलिस घर से उठाकर ले गई या जिन्हें फर्जी एनकाउंटरों में मार दिया गया।