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Chandigarh News: मंत्री संदीप सिंह के खिलाफ 700 पन्नों की चार्जशीट, महिला अफसर समेत 45 गवाह

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चंडीगढ़। जूनियर महिला कोच के यौन शोषण मामले में फंसे हरियाणा के पूर्व खेल मंत्री संदीप सिंह के खिलाफ चंडीगढ़ पुलिस ने करीब 700 पन्नों की चार्जशीट दायर की है और कुल 45 गवाह बनाए हैं। सूत्रों के मुताबिक, मामले में पीड़िता के अलावा दो अहम गवाह हैं। एक महिला अधिकारी को भी पुलिस ने गवाह बनाया है, जिसकी पीड़िता के साथ मोबाइल पर बातचीत की ट्रांसक्रिप्ट पुलिस ने चार्जशीट में शामिल की है। सूत्रों के मुताबिक, इसमें महिला अधिकारी पीड़ित कोच से कह रही है कि उसके साथ जो हो रहा है, वह मंत्री के चक्कर में हो रहा है। पुलिस ने सीआरपीसी की धारा-161 के तहत महिला अधिकारी के दर्ज बयान चार्जशीट में लगाए हैं। वहीं, चार्जशीट में पीड़िता द्वारा उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने की सभी घटनाएं सिलसिलेवार शामिल की गईं हैं। कहा गया है कि बार-बार ऐसे हालात बनाए गए ताकि महिला कोच पुलिस शिकायत वापस ले ले।
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सूत्रों के मुताबिक, चार्जशीट में यह भी बताया गया है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद भी किस तरह आरोपी पक्ष पीड़िता पर केस वापस लेने का दबाव बना रहा था। पीड़ित महिला कोच के अदालत में सीआरपीसी की धारा-164 के तहत दर्ज बयानों को प्रमुखता से चार्जशीट का हिस्सा बनाया गया है। इसके अलावा पीड़िता और आरोपी संदीप सिंह के मोबाइल फोन से प्राप्त डाटा और सोशल मीडिया पर हुई चैट की ट्रांसक्रिप्ट भी चार्जशीट में है।
बता दें कि मोबाइल फोन फोरेंसिक जांच के लिए भी भेजे गए थे। मामले में एक एसआईटी गठित कर बीते 31 दिसंबर को सेक्टर-26 थाना पुलिस ने आईपीसी की धारा 354, 354ए, 354बी, 342 और 506 के तहत मामला दर्ज कर बाद में धारा 509 जोड़ी थी। करीब आठ महीने की लंबी जांच के बाद यह चार्जशीट सीजेएम कोर्ट में दायर की गई है।
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आम आदमी होता तो कब की गिरफ्तारी हो जाती : बंसल
पीड़िता के वकील दीपांशु बंसल ने कहा कि चंडीगढ़ पुलिस ने मामले में काफी विस्तृत जांच की है मगर दुष्कर्म के प्रयास की धारा नहीं लगाई, जिसे लगवाने का प्रयास अदालत के समक्ष किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मामले में पुलिस पर हरियाणा सरकार का दबाव देखने को मिला। आम व्यक्ति के खिलाफ ऐसी धाराओं में जल्द कार्रवाई हो जाती है और गिरफ्तारी भी तुरंत होती है लेकिन इस मामले में गिरफ्तारी नहीं की गई। बता दें कि जिस अपराध में मंत्री के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है, उसमें अधिकतम पांच वर्ष की कैद संभव है। इस संज्ञेय अपराध में गैर-जमानती धाराओं में दर्ज मामले में पुलिस बिना वारंट के भी आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है।

सोफे पर बैठाकर छेड़खानी करने का है आरोप
मंत्री के सेक्टर-7 स्थित सरकारी आवास में यह घटना घटी थी। महिला कोच के मुताबिक, मंत्री संदीप सिंह जुलाई 2022 से पहले से स्नैपचैट और इंस्टाग्राम पर उसे मैसेज भेजा करते थे। इसके बाद एक जुलाई को स्नैपचैट पर मैसेज व कॉल कर उन्होंने उसे सेक्टर-7 स्थित अपने आवास पर बुलाया। कोच के मुताबिक, पहले भी वह उसे मिलने का दबाव बनाते थे और नौकरी से संबंधित कोच के दस्तावेजों की वैधता जांचने के लिए उसे घर बुलाया। वहीं कोच को स्पांसर करने का भी प्रलोभन दिया। पीड़िता कैब से मंत्री के आवास पर गई, जहां मंत्री उसे अपनी कोठी में एक कैबिन में ले गए और सोफे पर बैठाकर दस्तावेजों के सत्यापन के बहाने उसे गलत ढंग से छुआ और कहा कि वह उसे पसंद करते हैं। आरोप है कि मंत्री ने इस दौरान कहा कि ‘यह भागना-कूदना बंद करो, मैं तुम्हें स्पांसर करवा दूंगा, इंस्टाग्राम वेरिफाई करवा दूंगा। मुझे खुश रखो तो मैं तुम्हारा भी ख्याल रखूंगा।’ पीड़िता के मुताबिक, आगे मंत्री ने कहा कि और भी लड़कियां हैं जो उन्हें मना नहीं करतीं। इस दौरान संदीप सिंह गलत नीयत से छूता रहा और गलत इरादे से छेड़खानी शुरू कर दी। पीड़िता ने विरोध किया मगर मंत्री बलपूर्वक शारीरिक संबंध बनाने की नीयत से चूमने का प्रयास करने लगे। कोच ने अपने बचाव में मंत्री को धक्का दिया मगर उन्होंने उसकी टी-शर्ट फाड़ दी। कोच किसी तरह कमरे से बाहर निकली। घटना की सूचना विभाग और पुलिस को देने के बावजूद शुरुआत में पुलिस ने कार्रवाई नहीं की और उसे अपना काम करने के लिए कहा गया और यह सब नजरअंदाज करने को कहा गया। कोच के मुताबिक, पंचकूला के एक स्टेडियम में उसकी सितंबर, 2022 में ज्वाइन करने के बाद से उसे मंत्री ने परेशान करना शुरू कर दिया था। वहीं मंत्री ने बात न मानने पर उसका कॅरिअर खराब करने की कोशिश की और उसका झज्जर में तबादला तक कर दिया।
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