विभाग ने अभी तक अपनी जांच में विभिन्न जिलों से काफी नाम ऐसे पकड़े हैं, जिन्हें दूसरे के आधार पर राशन बांटा जा रहा था। इनमें अंबाला के 1178, भिवानी के 2525, फरीदाबाद के 13310, फतेहाबाद में 732, गुरुग्राम में 1351, हिसार के 4016, झज्जर के 1699, जींद के 1813, कैथल के 1825, करनाल के 3832, कुरुक्षेत्र के 1274, महेंद्रगढ़ के 719, मेवात के 8363, पलवल के 3011, पंचकूला के 458, पानीपत के 3168, रेवाड़ी के 510, रोहतक के 2392, सिरसा के 3796, सोनीपत के 1325 व यमुनानगर के 3214 लोगों के नाम शामिल हैं।
पहले सामने आई थी राशन कार्डों की गड़बड़ी
इस गड़बड़झाले से पहले फर्जी राशन कार्डों का मामला सामने आ चुका है। सरकार ने ऐसे 3.20 लाख राशन कार्ड पकड़े, जिनके साथ 26.45 लाख लोग अटैच थे, सरकार ने जब जुलाई 2017 से राशन वितरण में आधार लिंक का काम शुरू किया, तो ये लोग अचानक गायब हो गए। सरकार को 3.20 लाख राशन कार्ड निष्क्रिय करने पड़े।
सरकार को सिरसा से इस तरह की शिकायत मिली थी, जिसके बाद पूरे प्रदेश में जांच करवाई गई। आधार किसी का और राशन लेने वाले लोग कोई और, इस तरह की गड़बड़ी करने वाले राशन डिपो संचालकों और विभागीय कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हुए हैं। -कर्णदेव कम्बोज, खाद्य एवं आपूर्ति राज्यमंत्री, हरियाणा