चंडीगढ़। सेक्टर-39 थाना पुलिस ने शहर के अलग-अलग हिस्सों से दोपहिया वाहन चुराने के आरोप में मुखबिर समेत 6 युवकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 10 बुलेट समेत 40 वाहन बरामद किए हैं। इन आरोपियों की गिरफ्तारी से चोरी के सात मामले सुलझ गए हैं। आरोपियों में करनाल की पृथ्वी विहार कॉलोनी निवासी पुलिस का मुखबिर कवि सिंह (22), फतेहगढ़ साहिब के गांव हरगाने निवासी लवप्रीत सिंह उर्फ लवी (24), मोहनमाजरा निवासी हरदीप सिंह (23), मोहाली के श्यामपुर निवासी रविंदर गिरि उर्फ डीसी (25), भागोमाजरा निवासी बलजिंदर सिंह उर्फ हैप्पी (21) और मोटेमाजरा निवासी शरणजीत शामिल हैं।
साउथ एएसपी श्रुति अरोड़ा की अगुवाई वाली सेक्टर-39 थाने के अमनजोत सिंह की टीम के एएसआई विवेक कुमार को 29 नवंबर को सूचना मिली कि चंडीगढ़ व मोहाली से दोपहिया वाहन चोरी करने वाला गैंग सेक्टर-40 में घूम रहा है। पुलिस टीम ने सेक्टर-40सी/डी के पास पार्क से लवप्रीत सिंह, हरदीप सिंह, शरणजीत सिंह, रविंदर गिरि को चोरी के तीन बाइक और एक एक्टिवा पर फर्जी नंबर प्लेट के साथ गिरफ्तार कर लिया। वहीं, 30 नवंबर को पुलिस ने आरोपी कवि को चोरी के स्कूटर के साथ दबोच लिया, जबकि एक दिसंबर को बलजिंदर को पुलिस ने एक्टिवा के साथ दबोच लिया। एक्टिवा पर फर्जी नंबर (सीएच-01बीजे-9465) लगा हुआ था, जबकि असली नंबर (सीएच-01एडब्ल्यू-7122) था। जांच में सामने आया कि आरोपी बलजिंदर, कवि और शरणजीत पहले भी सेक्टर-17 व सेक्टर-39 थाने में चोरी के मामलों में गिरफ्तार है चुके हैं। शरणजीत बीसीए का छात्र है। पुलिस ने सभी आरोपियों को जिला अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
मुखबिर बना बाइक चोर
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी कवि पहले ऑटो चलाता था। इस दौरान उसकी एक लड़की से दोस्ती हो गई। बाद में मोहाली के थाने में लड़की के पिता ने कवि की शिकायत भी दी। थाने में दोनों पक्षों का समझौता हो गया। इसके बाद वह पुलिस का मुखबिर बन गया। वह नशा और शराब तस्करों के बारे में पुलिस को जानकारी देता था। पुलिस के बीच में रहकर उसने कई पुलिस वालों से जान-पहचान बना ली और फिर वह नशे की लत का आदी हो गया। इसके बाद उसने एक गैंग बनाया और फिर चंडीगढ़ व मोहाली से चोरियां करने लगा।
भोले-भाले लोगों को बेच देते थे वाहन
पुलिस के अनुसार, सभी आरोपी नशे के आदी हैं और नशे की लत को पूरा करने के लिए वाहन चोरी करते थे। आरोपी मोहाली, फतेहगढ़ साहिब के आसपास गांवों में भोले-भाले लोगों को सस्ते दामों में वाहन बेच दिया करते थे। वहीं, बाइक की एनओसी ग्राहकों को बाद में देने का वायदा कर नहीं लौटते थे।