फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chandigarh News: श्री कृष्ण को अर्पित किए गए 56 भोग

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। इंद्र देव के प्रकोप से ब्रजवासियों को बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठा लिया था। इस दौरान सात दिन आठ पहर के हिसाब से 56 प्रकार के व्यंजन खिलाए गए। तभी से 56 भोग परंपरा की शुरुआत हुई। यह प्रवचन सेक्टर 34 के प्रदर्शनी ग्राउंड में श्रीमद्भागवत कथा और वृंदावन प्राकट्य उत्सव के छठे दिन वीरवार को व्यास इंद्रेश उपाध्याय ने वीरवार को दिए। यह आयोजन श्री कृष्ण प्रिया जू संकीर्तन मंडल की ओर से किया जा रहा है।
विज्ञापन

इस कथा के दौरान गिरिराज पूजन हुआ। इसके बाद श्री गिरधर लाल जी को भक्तों ने 56 प्रकार के विभिन्न व्यंजनों का भोग लगाया। कथा के दौरान इंद्रेश महाराज ने दशहरे की शुभकामनाएं दी। मंच का संचालन संदीप चुघ ने किया। कथा में पंडित रसराज महाराज और श्याम सिंह चौहान महाराज निज मंदिर खाटू श्याम भी कथा श्रवण करने पहुंचे। उन्होंने कहा कि रावण कोई व्यक्ति नहीं है बल्कि स्वभाव है। रावण दो नाव पर पैर रखता था। एक तरफ शिव पूजा और दूसरी और छल कपट का स्वभाव रखता था। रावण का अंत भी अच्छा नहीं था। तक रावण का दहन होता आ रहा है। श्री राम जी ने रावण को बहुत संकेत दिए। रावण उन संकेतों को नहीं समझ पाया। ठीक इसी तरह कलयुग में भी मानव को बहुत संकेत मिलते है और उन संकेतों को सिर्फ एक सत्संगी और भजनानंदी समझ पाते हैं। कथा के दौरान भजन पर आए श्रद्धालु नृत्य करते रहे। छठे दिन डांडिया उत्सव भी आनंद के साथ मनाया गया।


प्रेसवार्ता में इंद्रेश महाराज ने कहा कि विद्यार्थी विद्या ग्रहण करने में पूरा ध्यान लगाएं। उन्होंने कहा कि बेहतर ढंग से विद्या ग्रहण करेंगे तो महान बनेंगे। सभी लोगों को भक्ति के लिए समय निकालना चाहिए। भक्ति से मानसिक तनाव दूर होता है। उन्होंने कहा कि कथा के दौरान युवा बहुत आ रहे हैं। यह बहुत ही अच्छी बात है।
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें