100 से ज्यादा छोटे-बड़े पतीले इस्तेमाल हो रहे हैं। रोजाना 15 क्विंटल आटा इस्तेमाल हो रहा है, जिसे मशीन से गूंथा जा रहा है। महिलाएं बड़े तवे पर चपातियां बनाने में जुटी हुई है। 40 से भी ज्यादा व्यंजन बन रहे हैं, जिनमें मिठाई और फास्टफूड भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि 13 अक्तूबर से लंगर निरंतर चल रहा है और 15 नवंबर तक जारी रहेगा।
एक लाख संगत के लंगर छकने के हॉल के अलावा स्पेशल फास्टफूड लंगर का हॉल भी है जहां फास्ट फूड की वैरायटी को सेवादार संगत की इच्छा के अनुरूप मुहैया करवा रहे हैं। अभी तो संगत की आमद के अनुरूप रसद तैयार की जा रही है, आगामी दिनों में संगत की तादाद बढ़ने पर 2.50 लाख संगत के लंगर छकने के प्रबंध की तैयारी है।
स्वच्छता का पूरा ध्यान रखते हुए सब्जियों को 6 एसी ट्रकों में स्टोर किया जाता है। सब्जियों की कटाई से लेकर लंगर तैयार करने में करीब 750 सेवादार-कारीगर लगे हुए हैं। रसोई में लंगर बनाने का सुचारु बंदोबस्त करने के लिए 50-50 सेवकों की सात कमेटियां बनाई हुई हैं, जो पूरा प्रबंध देखती हैं।
हर एक घंटे में लंगर में बनने वाली तीन-चार आइटमें बदल दी जाती हैं। 200 महिलाएं चपाती बनाने में मशगूल रहती हैं। बर्तन धोने के लिए एक खेत में पानी के सात बोर किए गए हैं। रसद रखने के लिए मोदीखाना (स्टोर) है। हर लंगर शुद्ध देसी घी में बन रहा है। 15 किलो क्षमता वाले 11 हजार देसी घी के टीन काम में लाए जा रहे हैं।
संगत की इच्छा अनुसार लंगर तैयार करने का भी प्रबंध
बाबा जी बताते हैं कि देश के विभिन्न सूबों से संगत आ रही है। 30 हजार से एक लाख तक संगत ऐसी है, जो कोई खास अपने क्षेत्र में प्रचलित लंगर को छकने की इच्छा रखती है तो उसके लिए भी व्यवस्था है। उनकी इच्छा के अनुसार लंगर बनाने के लिए कारीगर भी हैं। बस, आधे से पौने घंटे का समय चाहिए होगा, पसंदीदा लंगर का भी प्रबंध कर दिया जाएगा।
लंगर की रसोई के इंचार्ज इंद्रजीत सिंह के अनुसार बर्गर के लिए प्रतिदिन 5 लाख टिक्की का बंदोबस्त रात को कर दिया जाता है। संगत के बढ़ने पर यह तादाद बढ़ेगी। रोज एक टन जलेबी बन रही है। कॉफी की 20-25 मशीनें लगी हैं। प्रतिदिन 400 टीन देसी घी की खपत हो रही है। डेरा बाबा नानक में भी लंगर लगा है, तीन नवंबर के बाद वहां लगे कारीगर भी सुल्तानपुर लोधी पहुंच जाएंगे।
लंगर में चाय, पकौड़े, गुलाब जामुन, बेसन, बर्फी, शक्करपारे, जलेबी, बालूशाही, मटर पनीर, पालक पनीर, कढ़ी, चावल, दाल मक्खनी, मिक्स वेज, काले चने, सफेद चने, सरसों का साग, चपाती, नान, मिस्सी रोटी, तंदूरी रोटी, रुमाली रोटी, मक्की दी रोटी, पोहा, उपमा, टिक्की, भल्ला पापड़ी, चाट की व्यवस्था है। फास्ट फूड में बर्गर, पिज्जा, मंचूरियन और सैंडविच उपलब्ध हैं। कॉफी और कोल्ड ड्रिंक उपलब्ध है।
गुरुद्वारा श्री बेर साहिब में बढ़ रही संगत की तादाद
श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाशपर्व के उपलक्ष्य में ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री बेर साहिब में प्रतिदिन लाखों की तादाद में संगत नतमस्तक होने पहुंच रही है। शनिवार को गुरुद्वारा श्री बेर साहिब में लगभग दो लाख से अधिक संगत ने माथा टेका और पावन सरोवर में स्नान किया। एसजीपीसी की ओर से आयोजित 13 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों की रूपरेखा के तहत गुरुद्वारा श्री बेर साहिब और भाई मरदाना जी दीवान हॉल में सुबह से शाम तक गुरमति समागमों का आयोजन किया गया।
सुबह आसां दी वार का कीर्तन सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के हजूरी रागी भाई लखविंदर सिंह ने किया। ज्ञानी बलदेव सिंह श्री पाउंटा साहिब वालों ने गुरशबद विचारों से सत्संग को निहाल किया। दिन के दीवान में सचखंड श्री हरमंदिर साहिब अमृतसर के हजूरी रागी जत्थेदार भाई शौकीन सिंह, भाई जरनैल सिंह कोहाड़का, भाई जसपिंदर सिंह और भाई हरपिंदर सिंह ने कीर्तन किया। शाम के दीवान में ज्ञानी किशन सिंह संतन की कुटिया वालों ने संगत के साथ गुरशब्द के विचारों को साझा किया।