चंडीगढ़। नगर निगम ने शहर की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को पूरी तरह स्मार्ट बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। शहर की करीब 55 हजार स्ट्रीट लाइट प्वाइंट को स्मार्ट कंट्रोल सिस्टम से जोड़ा जाएगा। इनका संचालन, निगरानी और शिकायतों का निस्तारण सेक्टर-17 स्थित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) से किया जाएगा। इसके लिए नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) के मॉडल पर रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) तैयार की गई है। प्रस्ताव को अगली निगम हाउस बैठक में मंजूरी मिलने के बाद टेंडर जारी किया जाएगा।
नई व्यवस्था लागू होने पर प्रत्येक स्ट्रीट लाइट की रियल टाइम मॉनिटरिंग होगी। किसी भी क्षेत्र में लाइट बंद होने या खराब होने की सूचना तत्काल कंट्रोल सेंटर तक पहुंचेगी, जिससे शिकायतों का त्वरित समाधान संभव होगा। इससे अंधेरे वाले क्षेत्रों की समस्या कम होगी और बिजली की खपत पर भी नियंत्रण रहेगा।
नई एजेंसी शहर की 55 हजार एलईडी और स्मार्ट स्ट्रीट लाइटों को बदलने के साथ-साथ खराब हो चुके बिजली के तार भी बदलेगी। निगम ऊर्जा बचत से होने वाली राशि में से कंपनी को मासिक भुगतान करेगा। टेंडर में वही कंपनी चुनी जाएगी, जो बेहतर प्रदर्शन के साथ बिजली बचत में निगम से सबसे कम हिस्सेदारी की मांग करेगी। चयनित एजेंसी को 10 वर्ष तक स्ट्रीट लाइटों की स्थापना और रखरखाव की जिम्मेदारी दी जाएगी।
2020 से 2024 तक ईईएसएल के पास था जिम्मा
नगर निगम ने वर्ष 2019 में स्ट्रीट लाइटों का काम पांच साल के लिए एनर्जी एफिसिएंसी सर्विस लिमिटेड (ईईएसएल) को दिया था। कंपनी ने शहर की सभी स्ट्रीट लाइटों को एलईडी में बदला और वर्ष 2020 से ऊर्जा बचत के आधार पर भुगतान शुरू हुआ। बिजली बिल में हुई बचत के आधार पर निगम हर महीने कंपनी को करीब 15 लाख रुपये देता था। अनुबंध के अनुसार 90 प्रतिशत से अधिक स्ट्रीट लाइटों का चालू रहना अनिवार्य था। इससे कम प्रदर्शन पर निगम जुर्माना लगाता था।
बिल भुगतान और जुर्माना राशि को लेकर निगम और ईईएसएल के बीच विवाद हो गया। इसके बाद कंपनी ने जुलाई 2024 में मेंटेनेंस कार्य छोड़ दिया। कंपनी ने करीब छह करोड़ रुपये के बकाया बिल की मांग क, जबकि निगम ने कम लाइट जलने पर लगाए गए जुर्माने को समायोजित कर बिल को माइनस में दर्शाया।
अब निगम संभाल रहा जिम्मेदारी, बढ़ीं मुश्किलें
ईईएसएल के काम छोड़ने के बाद से नगर निगम का इलेक्ट्रिकल विंग ही स्ट्रीट लाइटों का रखरखाव कर रहा है। पर्याप्त संसाधन और उपकरण नहीं होने से व्यवस्था प्रभावित रही। अधिकांश एलईडी लाइटें अपनी गारंटी अवधि से एक वर्ष अधिक चल चुकी हैं, जिससे उनकी रोशनी काफी कम हो गई है। कई सड़कों पर अंधेरा रहने से लोगों को परेशानी हो रही है और आवारा पशुओं की वजह से सड़क हादसों का खतरा भी बढ़ा है।
बिजली बिल भी बढ़ा
स्ट्रीट लाइटों की कार्यक्षमता घटने का असर बिजली खपत पर भी पड़ा है। पहले जहां नगर निगम का मासिक बिजली बिल करीब 60 लाख रुपये आता था, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 70 लाख रुपये प्रति माह हो गया है। निगम का मानना है कि नई स्मार्ट एलईडी लाइटें और आधुनिक कंट्रोल सिस्टम लागू होने के बाद बिजली की बचत होगी, रखरखाव बेहतर होगा और शहर की सड़कें पहले से अधिक रोशन नजर आएंगी।
कोट...
शहर की लाइट स्मार्ट और नई तकनीक की एलईडी में चेंज करने और पुरानी वायर बदलने के लिए आरएफपी बनाई जा रही है। इसे एनडीएमसी पैटर्न पर तैयार किया जा रहा है। अब स्ट्रीट लाइट को सेक्टर 17 आईसीसीसी से जोड़ा जाएगा। वहीं से ऑन ऑफ होंगी। एक कर्मचारी वहीं बैठकर एरिया वाइज बंद होने वाली लाइट की डिटेल बनाएगा। उसे अगले दिन कंपनी का स्टाफ ठीक करेगा। - संजय अरोड़ा, चीफ इंजीनियर, नगर निगम