भारत आजादी की 72वीं वर्षगांठ मना रहा है लेकिन भारत के 54 परिवार ऐसे भी हैं जो 1965 और 1971 के युद्ध के दौरान लापता हुए भारतीय सैनिकों को एक नजर देखने की बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इनमें बरनाला के गांव कर्मगढ़ के लाल सिंह का परिवार भी है। उन्हें भारतीय फौज द्वारा सेवाकाल के दौरान कई मैडल दिए गए थे। भारत सरकार सैनिक लाल सिंह को शहीद करार दे चुकी है जबकि कुछ समय पहले पाकिस्तान जेल से रिहा होकर लौटे सतीश कुमार ने पुष्टि की थी कि पाकिस्तान स्थित शाही किला इंटेरोगेशन सेंटर लाहौर में उसकी मुलाकात लाल सिंह से हुई थी।
उसने पत्र में यह भी लिखा कि लाल सिंह इस वक्त पाकिस्तान के किला अटैक फ्रंटियर (अटकल) जेल में है। इसके बाद पीड़ित परिवार को लाल सिंह के जिंदा होने और लौटने की आस बंधी। इसके बावजूद भारत सरकार ने पाक सरकार से संपर्क नहीं किया। पीड़ित परिवार का दावा है कि उनका लाल सिंह जीवित है।
15 अक्तूबर 1965 को परिवार को भारतीय सेना के कमांडेट पीके नंदगोपाल के हस्ताक्षरों वाला पत्र मिला था, जिसमें लिखा था कि सैनिक लाल सिंह दुश्मन फौज का मुकाबला करते युद्ध में शहीद हो गया है। लाल सिंह का शव नहीं मिलने पर परिवार ने दावा किया कि लाल सिंह जीवित है, उसे ढूंढा जाना चाहिए। किसी सरकार ने इस पीड़ित परिवार की नहीं सुनी।