हरियाणा में वैड रिफंड में 10 हजार करोड़ नहीं, बल्कि पचास हजार करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। यह आरोप लगाया है मामले में शिकायतकर्ता और कैथल के सतबीर किच्छाना ने। मामले की एसआईटी जांच से भी सतबीर संतुष्ट नहीं हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि रोजाना प्रदेश सरकार को पांच करोड़ रुपये का चूना लग रहा है। अगर सही तरीके से जांच की जाए तो यह चपत सरकार के खजाने में जमा हो सकती है।
सतबीर ने प्रदेश में टैक्स माफिया, ट्रांसपोर्टरों एवं भ्रष्ट अधिकारियों से जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा भी मांगी है। इसके अलावा कहा कि कैथल में 18 करोड़ नहीं, 300 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला हुआ है।
एसआईटी ने 10 हजार करोड़ का बताया था घोटाला
गौरतलब है कि मामले में सतबीर की शिकायत पर लोकायुक्त के आदेश पर एसआईटी गठित की गई। टीम ने जांच रिपोर्ट लोकायुक्त को सौंप दी है। रिपोर्ट में प्रदेश भर में 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले की बात कही गई है।
घोटाले को उजागर करने के लिए अप्रैल 2011 से संघर्ष करने वाले सतबीर ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि जो जांच रिपोर्ट सौंपी गई है, वह उससे संतुष्ट नहीं हैं। लोकायुक्त ने रिपोर्ट के लिए 22 जनवरी की तिथि निर्धारित की है।
वह मामले में विस्तृत जांच की मांग करेंगे। यदि पूरे मामले की जांच की जाए तो हरियाणा में टैक्स चोर माफिया, भ्रष्ट अधिकारी, भ्रष्ट ट्रांसपोर्टर एवं टैक्स चोरों को संरक्षण देने वाले कई भ्रष्ट नेताओं के चेहरे भी उजागर हो सकते हैं। टैक्स चोरी के अलावा फर्जी कागजातों के आधार पर करोड़ों रुपये की राशि सरकार से टैक्स रिफंड के माध्यम से हड़पी जा रही है।
‘ऐसे होती है टैक्स एवं रिफंड की चोरी’
पेशे से ट्रांसपोर्टर रह चुके सतबीर ने बताया कि हरियाणा, पंजाब, दिल्ली सहित कई राज्यों से लोहा, पत्थर, चावल इधर-उधर आता-जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कैथल से फर्जी खरीद का बिल दिखाकर सरकार को टैक्स भरा दिखाकर करोड़ों रुपये का रिफंड करवा लिया जाता है।
इसमें विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत रहती है। वे चूंकि ट्रांसपोर्टर रहे हैं, इसीलिए उन्हें यह पता है कि किस फाइल में फर्जी बिल लगाए गए हैं। जब कैथल की केवल 25 फाइलों की जांच में 100 करोड़ का मामला उजागर हो सकता है तो यहां ऐसी करीब 1000 फाइलें हैं।
इसके अलावा वर्ष 2011 में उन्होंने जब शिकायत की थी तो केवल चार गाड़ियों की जांच में सात लाख रुपये का जुर्माना विभाग ने किया था। ऐसे में हरियाणा में हर रोज चलने वाली 550 से ज्यादा गाड़ियों की जांच में यह टैक्स चोरी कितनी हो सकती है, इस बात का अंदाजा खुद ही लगाया जा सकता है।