इस तरह हर 10 वर्ष में पांच वर्ष हरियाणा के हर गांव में महिला सरपंच होगी। आरक्षित पदों पर भी यह नियम लागू होगा और उनमें भी सम-विषम संख्या के आधार पर पद आरक्षित होंगे। यही नहीं, ग्राम पंचायत के पंचों के विषय में भी यही प्रक्रिया रखी जाएगी और 50 फीसदी पंचों के पद महिलाओं के लिए रहेंगे।
डिप्टी सीएम ने बताया कि यह व्यवस्था ग्राम पंचायतों से आगे बढ़कर जिला परिषद और ब्लॉक पंचायत समिति में भी लागू होगी। जिला परिषद और ब्लॉक समिति के सदस्यों और चेयरमैन के पदों के लिए भी सम-विषम का फार्मूला इस्तेमाल किया जाएगा। पंचायती राज एक्ट में इस महत्वपूर्ण बदलाव के बाद हरियाणा के पंचायती राज तंत्र में महिलाओं की 50 फीसदी भागीदारी सुनिश्चित हो जाएगी।
इस व्यवस्था के लिए अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित सीटों और अन्य सीटों के लिए अलग-अलग समूह माने जाएंगे और उन समूहों में महिला आरक्षण लागू किया जाएगा। बाढड़ा विधायक नैना चौटाला ने इस पर सरकार का धन्यवाद करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के लिए यह विधेयक एक वरदान साबित होने वाला है।
बीसी-ए वर्ग को भी पंचायत चुनाव में आठ फीसदी आरक्षण
ग्राम पंचायत के चुनाव में पहली बार बीसीए (पिछड़ा वर्ग ए) वर्ग को आठ प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा। डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने बताया कि इस नियम के लागू होने से बीसीए वर्ग के लोगों पंचायती राज संस्थाओं में और अधिक प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलेगा। सीएम मनोहर लाल ने कहा कि सरकार ने महसूस किया है कि इस वर्ग के लोग अभी पिछड़े हुए हैं।
मगर इस विधेयक से ऐसे लोगों की नेतृत्व क्षमता बढ़ेगी। विधानसभा में राज्यमंत्री अनूप धानक, जजपा विधायक देवेंद्र बबली व अन्य माननीय सदस्यों ने राइट टू रीकॉल विधेयक, बीसी-ए वर्ग को पंचायत चुनाव में आठ फीसदी आरक्षण, प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल व उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला का आभार प्रकट किया।