ट्रांसपोर्ट लाइट प्वाइंट के पास सड़क किनारे ग्राउंड में सो रहे लोगों पर नशे की हालत में ट्रक चढ़ाने के मामले में ड्राइवर शर्मा चौधरी निवासी बेतिया (बिहार) पर धारा 302 और 307 के तहत दोष साबित नहीं हो सका। इस पर अदालत ने उसे धारा 304 (2) के तहत छह साल और धारा 308 आईपीसी के तहत 3 साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। अदालत के आदेश के तहत दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। वहीं मामले में सहआरोपी कंडक्टर अजय चौधरी को अदालत पहले ही बरी कर चुकी है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि केस में अभियोजन पक्ष ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर सका जिससे साबित हो कि जस्सू राम, सरदार राम, जगदीश, नाथू राम और हरिंदर की हत्या और कमलेश, राघव तिवारी, उपेंदर की हत्या के प्रयास का आरोप साबित हो। साथ ही हत्या का कोई मोटिव भी नहीं था। इसलिए शर्मा चौधरी को हत्या और हत्या के प्रयास की धाराओं के तहत दोषी नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि मौखिक, दस्तावेजी और परिस्थितिजन्य सबूत अभियोजन के पक्ष में है। इसलिए शर्मा चौधरी को आइपीसी की धारा 304 (2) और 308 के तहत दोषी पाया जाता है।
सभी आई विटनेस ने कहा अंधेरा था, शक्ल नहीं देख सके
पुलिस ने केस में कुल 28 गवाह बनाए थे। इनमें जांच अधिकारी और पुलिसकर्मियों को छोड़ दिया जाए तो घटना स्थल पर मौजूद और केस में पांच आई विटनेस बनाए गए। पांचों ने अदालत में कहा कि, ‘घटना के वक्त वहां पर अंधेरा था और ट्रक कौन चला रहा था वह नहीं देख सके।’ वैसे भी ट्रक को भगाने के बाद चालक और कंडक्टर उसे कूड़ेदान से टकरने के बाद छोड़ कर फरार हो गए थे।