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विश्व सामाजिक कार्य दिवस : चंडीगढ़ में 4900 सामाजिक संस्थाएं, 183 ही कर रही सेवा, बाकी कागजों पर 

Tue, 16 Mar 2021 11:30 AM IST
निवेदिता वर्मा नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • चंडीगढ़ में पंजीकृत हैं 4900 सामाजिक संस्थाएं 
  • इनमें से मात्र 183 ही हैं सक्रिय, अन्य संस्थाएं सिर्फ कागजों में ही कर रही काम 
  • निष्क्रिय संस्थाओं की कभी नहीं होती जांच 
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विस्तार
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हर साल मार्च माह के तीसरे मंगलवार को ‘विश्व सामाजिक कार्य दिवस’ के तौर पर मनाया जाता है। कोरोना महामारी के दौरान सामाजिक संस्थाओं की भूमिका भी लोगों को समझ आई। हर संस्था ने अपने स्तर पर लोगों को मदद का प्रयास किया। लेकिन चंडीगढ़ में आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति ठीक नहीं है। यहां लगभग 4900 सामाजिक संस्थाएं पंजीकृत हैं, लेकिन मात्र 183 ही सक्रिय हैं। अन्य संस्थाएं सिर्फ कागजों में ही काम कर रहीं हैं।
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आंकड़ों के अनुसार शहर में पंजीकृत संस्थाओं में से मात्र 183 ही नीति आयोग के पास पंजीकृत हैं। चूंकि नीति आयोग पंजीकरण से पहले पूरी तरह जांच पड़ताल करती है। किसी भी स्तर कमी मिलने पर पंजीकरण रद्द हो जाता है। अधिकारियों और सरकार की नजरों में आने के लिए संस्थाएं पंजीकृत तो हो जाती हैं, लेकिन कुछ समय बाद निष्क्रिय हो जाती हैं। इन निष्क्रिय संस्थाओं की कभी जांच भी नहीं होती है। कागजों में ही यह संस्थाएं काम करती रहती हैं।

सामाजिक संस्थाएं एक नजर में
  • 1983 में अंतरराष्ट्रीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का फेडरेशन बना
  • 2014 में चंडीगढ़ में एसोसिएशन ऑफ प्रोफेशनल सोशल वर्कर्स एंड डेवलपमेंट प्रैक्टिशनर बना
  • 10 मिलियन सामाजिक संस्थाएं दुनिया में पंजीकृत हैं
  • 10 लाख से ज्यादा सामाजिक संस्थाएं देश में पंजीकृत हैं 
  • 4900 लगभग सामाजिक संस्थाएं चंडीगढ़ में पंजीकृत हैं 
  • 183 सामाजिक संस्थाएं नीति आयोग में पंजीकृत हैं

42 क्षेत्रों में कार्य करती हैं सामाजिक संस्थाएं
सामाजिक कार्यकर्ता के लिए वैसे तो कोई क्षेत्र या मुद्दा नहीं होता है, लेकिन फेडरेशन ने 42 मानकों को अपना मुख्य लक्ष्य माना है। जिसमें प्रमुख रूप से महिला विकास एवं सशक्तिकरण, कौशल प्रशिक्षण, विज्ञान का प्रसार, सूचना का अधिकार, पंचायतीराज, पर्यावरण, अल्पसंख्यक, कानूनी सलाह, मानवाधिकार, शिक्षा जगत, दिव्यांग, बाल विकास, नागरिक क्षेत्र और आपदा प्रबंधन प्रमुख हैं।
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पर्यावरण संरक्षण के लिए हम सदैव तत्पर
पर्यावरण के क्षेत्र में हमने काफी काम किया है। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर दो बार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार पुरस्कार मिल चुका है। हमें सामाजिक एवं आर्थिक परिषद संयुक्त राष्ट्रीय से विशेष परामर्शी दर्जा प्राप्त है। -रेखा त्रिवेदी, महासचिव, एसोसिएशन ऑफ प्रोफेशनल सोशल वर्कर्स एंड डेवलपमेंट प्रैक्टिशनर

समाज को नई दिशा दिखाना मूलमंत्र 
सामाजिक संस्था का मुख्य उद्देश्य होता है समाज में समानता लाना। इस कार्य में युवाओं की भूमिका प्रमुख होती है। हमने अपने स्तर पर नवाचार के प्रयोग किए और कबाड़ से रुपया इकट्ठा कर बच्चों की पढ़ाई के लिए कार्य किया। इसके लिए हमें राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कार भी मिला। -रोहित, संस्थापक, स्वरमनी फाउंडेशन

जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त में पढ़ाया, बने टॉपर 
मलोया और धनास जैसी जगहों पर हमने जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क पढ़ाया। जरूरत पड़ने पर अपनी पॉकेट मनी से उनकी पुस्तकों की भी व्यवस्था की। इन बच्चों में से कुछ बच्चे टॉपर निकले तो मन को काफी प्रसन्नता हुई। -शिप्रा, संस्थापक, परवाज फाउंडेशन

महिलाओं को दिया रोजगार 
हमने महिलाओं के रोजगार के लिए काफी काम किया है। उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षण दिलाया। समासेवा के लिए वर्ष 2016 में हमें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। वहीं 2012 और 2017 में राज्यस्तर पर भी हमें पुरस्कार मिला। - संगीता वर्धन, संस्थापक, वत्सल छाया ट्रस्ट

समाज कल्याण विभाग द्वारा संस्थाओं से आवेदन मांगे जाते हैं और फिर उन्हें विशेष ग्रांट मुहैया कराया जाता है। जिन एनजीओ को प्रशासन ग्रांट देता है, उनकी ही विभाग द्वारा समय-समय पर जांच की जाती है। बाकी जो एनजीओ सक्रिय नहीं है, उनसे विभाग का कोई लेना-देना नहीं है।  - यशपाल गर्ग, सचिव, समाज कल्याण विभाग 

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