चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (सीटीयू) की लोकल और लॉन्ग रूट की 450 से ज्यादा बसों में रोजाना तीन निजी पेट्रोल पंपों से डीजल भरवाया जा रहा है। ये तेल सिटको और नगर निगम के पंपों से क्यों नहीं भराया जा रहा और किस आधार पर सिर्फ इन तीन पंपों का चयन हुआ है, ये सवाल उठाते हुए विजिलेंस ने विभाग के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। इस जांच की आंच में प्रशासन के कई बड़े अधिकारी हैं।
सीटीयू के चार डिपो हैं। पहले बसों में डिपो के अंदर ही डीजल भरे जाते थे। इसके लिए सीटीयू बल्क में तेल कंपनियों से डीजल खरीदता था। 17 मार्च 2022 को सीटीयू के गवर्निंग बॉडी की बैठक में फैसला लिया गया कि विभाग बल्क में डीजल न खरीद कर रिटेल में शहर के पेट्रोल पंपों से डीजल खरीदेगा। इसके लिए सेक्टर-34, 43 और 44 के पेट्रोल पंप का चयन किया गया, जहां रोजाना सीटीयू के 450 से ज्यादा बसें करीब 36 हजार लीटर डीजल डलवाती हैं। इसकी कीमत रोजाना करीब 30 लाख रुपये है।
इस पूरी प्रक्रिया में विजिलेंस को भ्रष्टाचार की शिकायत मिली है। प्रति लीटर कुछ पैसे कमीशन के रूप में तय होने की बात कही गई, जिसके बाद विजिलेंस ने जांच शुरू कर दी और सीटीयू से कई सवाल पूछे हैं। बीते दिनों हुई गवर्निंग बॉडी की बैठक में इस मुद्दे पर काफी हंगामा हुआ, जिसमें परिवहन और विजिलेंस विभाग के अधिकारी आमने-सामने आ गए। बैठक की अध्यक्षता सलाहकार धर्मपाल कर रहे थे। बता दें कि निजी पंपों पर सीटीयू ने अपने चालक, क्लर्क स्टाफ, रिकॉर्ड और डाटा मेंटेन करने के लिए भी कई कर्मचारियों की तैनाती की है।
परिवहन विभाग के बड़े अधिकारियों पर जांच की आंच
रोजाना करीब 36 हजार डीजल सीटीयू की बसों में डलता है। आयल कंपनी से पेट्रोल पंप को प्रति लीटर कुछ रुपये डीलर्स कमीशन के रूप में मिलता है। अगर सीटीयू रोजाना 36 हजार लीटर डीजल सिटको या नगर निगम के पेट्रोल पंप से भराता तो डीजल के पैसे के साथ डीलर्स कमीशन भी प्रशासन के दोनों विभाग के पास आता। आरोप है कि इस तरह से डीजल बाहर से भरवाकर सीटीयू ने प्रशासन का काफी नुकसान कराया है। विजिलेंस की जांच की आंच परिवहन विभाग के बड़े अधिकारियों तक भी पहुंच सकती है, जिन्होंने इसकी मंजूरी दी। हालांकि सूत्रों के अनुसार 17 मार्च 2022 को फैसला होने के बाद सीटीयू ने सिटको की एमडी पूर्वा गर्ग को भी पत्र लिखा था और सिटको के पंपों से डीजल भरवाने के लिए आग्रह किया था, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। इस बीच 24 मार्च को क्रूड आयल के दाम बढ़ने से बल्क में डीजल के दाम 25 रुपये बढ़ गए। इससे सीटीयू को रोजाना करीब साढ़े 6 लाख रुपये का नुकसान होने लगा।
विजिलेंस के सवाल पर सीटीयू ने दिया 15 पेज का जवाब, कहा- हमने करोड़ों बचाए
विजिलेंस के सवाल पर सीटीयू में करीब 15 पेज का जवाब दिया है। कहा कि बल्क से रिटेल में डीजल खरीदने के फैसले के बाद सीटीयू ने करीब 16 करोड़ रुपये बचाए हैं। इसके अलावा प्रति लीटर पर पंप ने सीटीयू को 70 पैसे का डिस्काउंट दिया है, जो किसी भी रोडवेज को मिलने वाले डिस्काउंट में सबसे ज्यादा है। इससे सीटीयू ने करीब 54 लाख रुपये बचाए हैं। साथ ही डेड किमी (डिपो से किसी भी पेट्रोल पंप तक जाने वाला रास्ता) भी कम किया है। हालांकि विजिलेंस सीटीयू के सवाब से संतुष्ठ नही है और इसके बाद भी कई सवाल सीटीयू के अधिकारियों पर दागे हैं। पूछा है कि निजी पंप से डीजल भरवाने पर पंप को कितना फायदा हुआ है। एक और आरोप लग रहा है कि अगर निजी पंप से ही डलवाना था तो टेंडर आदि का सहारा क्यों नहीं लिया गया।
विजिलेंस के सवाल
1. सीटीयू के डिपो के अंदर टैंक में कितना डीजल पड़ा हुआ है
2. बसों में डीजल कहां से भरवा रहे हैं
3. हर महीने डीजल का खर्चा कितना है
4. सिटको या नगर निगम से क्यों नहीं भरवाया
5. निजी पंप को प्रति लीटर कितना रुपये बचा
सीटीयू की बसों में रोजाना भरता है करीब 36 हजार लीटर डीजल
डिपो नंबर-1 - 15 हजार लीटर (रोजाना)
डिपो नंबर-2 - 6.5 हजार लीटर (रोजाना)
डिपो नंबर-3 - 6.5 हजार लीटर (रोजाना)
डिपो नंबर-4 - 8 हजार लीटर (रोजाना)