वैसे प्रदूषण का विनियमन करने वाले प्राधिकारों का कहना था कि इस बार दिवाली के बाद वायु की गुणवत्ता पिछले साल की तुलना में बेहतर रही। लुधियाना के पुलिस उपायुक्त अश्विनी कपूर ने बृहस्पतिवार को बताया, ‘‘हमने (उच्चतम न्यायालय के आदेश के) उल्लंघन को लेकर अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ अब तक 14 मामले दर्ज किये हैं। ’’
उच्चतम न्यायालय के आदेश का इन दोनों राज्यों में कई स्थानों पर उल्लंघन हुआ। रात आठ बजे से पहले ही लोग पटाखे जलाने लगे और दस बजे तक जलाते रहे। पंजाब में वायु गुणवत्ता सूचकांक लुधियाना में 221, जालंधर में 266, अमृतसर में 221, पटियाला में 271, मंडी गोविंदगढ़ में 223 और खन्ना में 215 रहा। हरियाणा में दीपावली के बाद वायु गुणवत्ता सूचकांक रोहतक में 300 और गुरुग्राम में 353 रहा । यह स्थिति ‘‘खराब’’ से ‘‘बेहद खराब’’ है ।
अधिकारियों ने बताया कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 401 रहा जो ‘‘गंभीर स्थिति’’ के आस पास है। उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ में वायु गुणवत्ता सूचकांक 155 है जो ‘‘मध्यम’’ स्थिति में है । पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुख्य पर्यावरणीय अभियंता करूणेश गर्ग ने बताया, ‘‘पिछले साल की दीपावली के समय से अगर आप वायु गुणवत्ता स्तर की तुलना करेंगे तो इस साल प्रदूषण स्तर 25 से 30 फीसदी कम है। इस साल वायु गुणवत्ता कहीं बेहतर है।’’
गर्ग ने बताया कि पंजाब के विभिन्न हिस्सों में दिवाली के बाद वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 के ऊपर चला जाता है। शीर्ष अदालत के आदेश से पटाखा चलाने के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाने में बहुत अधिक मदद मिली है । उन्होंने बताया, ‘‘पहले लोग दिवाली से कुछ दिन पहले से पटाखे चलाना प्रारंभ कर देते थे। लेकिन इस बार उन्होंने सिमित अवधि तक ही पटाखे चलाये ।’’ इस बार व्यापरियों ने भी पटाखों का कम ही स्टाक लिया था क्योंकि उन्हें नहीं बिकने की स्थिति में घाटे का डर था ।