करीब एक दर्जन गांवों में खाने-पीने की वस्तुओं की किल्लत हो गई है। यहां सड़कों पर तीन से चार फीट पानी भरा है। कई जगह सात से आठ फीट पानी भी है। आवागमन के रास्ते बंद होने से लोग घरों में कैद होकर रह गए हैं। दोपहर को मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर गुजरा तो लोग टकटकी लगाएं आसमान की तरफ देखने लगे और सोचा की राहत के पैकेट बरसाएं जाएंगे, लेकिन हेलीकॉप्टर बिना कुछ गिराए ही आंखों से ओझल हो गया।
अनाज खराब, खाने के लाले पड़े
बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों का कहना है कि घर में पड़ा अनाज बर्बाद हो गया है। साथ ही बढ़े जलस्तर के कारण मवेशियों को काफी परेशानी के बीच रखना पड़ रहा है।
भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान संजु गुंदयाना ने सरकार से मांग की कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों की मदद करें और यमुना का जल स्तर कम होने के बाद प्रभावित फसलों की गिरदावरी करवाकर किसानों का प्रति एकड 50 हजार रुपये मुआवजा दिया जाए।
इस बारे में सिंचाई विभाग के एक्सईएन हरिदेव कांबोज का कहना है कि मालीमाजरा और बेलगढ में यमुना की पटरी का दौरा करने गए थे। बाढ़ से कुछ किसानों के खेतों में पानी भर गया है, इसलिए लोगों में गुस्सा है। यमुना किनारे पटरी का कुछ हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हुआ है। इसे रिपेयर करवाने के लिए एस्टीमेट बनाया जाएगा और जल्दी ही यहां काम शुरू होगा।
सीएम साहब ने हवाई सर्वेक्षण किया था। पानी का सैलाब निकल चुका है और फिलहाल स्थिति कंट्रोल में हैं। सावधानी के तौर पर कुछ गांवों को खाली करवाने का प्रयास किया था, लेकिन ग्रामीणों ने खुद ही मना कर दिया। खेतों में जो पानी भरा है, वो धीरे-धीरे उतरने लगा है।
-गिरीश अरोड़ा, डीसी, यमुनानगर