हरियाणा के 33 आईएएस और आईपीएस अधिकारी अपनी संपत्ति सार्वजनिक न करने पर अड़े हुए हैं। 9 वर्ष पुराना केस राज्य सूचना आयोग में विचाराधीन है। इस मामले की महत्वपूर्ण सुनवाई 26 जून को राज्य सूचना आयुक्त योगेंद्र पाल गुप्ता व हेमंत अत्री की डिवीजन बेंच करेगी।
आयोग ने कार्मिक विभाग के अवर सचिव, डीजीपी कार्यालय के अधीक्षक, पुलिस मुख्यालय के एसपी (कानून व्यवस्था) व अपीलकर्ता पीपी कपूर को भी सुनवाई के लिए बुलाया है। कुल 69 में से 36 आईएएस ने अपनी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने की सहमति वर्ष 2010 में सरकार को दे दी थी, जबकि 33 आईएएस ने मना कर दिया था। तब से केस सूचना आयोग में लंबित है।
आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने बताया कि 9 वर्ष पूर्व 16 दिसंबर 2009 को उन्होंने मुख्य सचिव को आरटीआई भेजकर प्रदेश के सभी आईएएस, आईपीएस, एचपीएस, एचसीएस अफसरों की संपत्ति का ब्योरा मांगा था। पुलिस मुख्यालय ने तो इस सूचना को देने से स्पष्ट मना कर दिया, जबकि सरकार ने सभी आईएएस अधिकारियों से इस बारे में उनकी राय मांगी थी। इस पर आईएएस अशोक खेमका, समीर माथुर, उमाशंकर, पीके दास, डा. जे गणेशन, डॉ. अमित अग्रवाल सहित कुल 36 आईएएस ने संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने की सहमति सरकार को दे दी थी।
आईएएस अशोक खेमका ने तो कैबिनेट सचिव व केंद्रीय सतर्कता आयुक्त को भेजे पत्र में कहा कि ईमानदार लोक सेवकों को अपनी संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक करने में कोई भय नहीं होना चाहिए। ऐसे कदमों से सार्वजनिक संस्थानों में पारदर्शिता व विश्वास को बढ़ावा मिलता है। वहीं, आईएएस सुप्रभा दहिया, विजय दहिया, अशोक लवासा, डॉक्टर चंद्रशेखर, सुनील गुलाटी, वीएस कुंडू सहित कुल 33 आईएएस ने अपनी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने से स्पष्ट इंकार कर दिया था।
फरवरी 2012 में राज्य सूचना आयोग की फुल बेंच ने इस केस की सुनवाई की थी, लेकिन राज्य सूचना आयोग ने जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक डीपी जांगड़ा की संपत्ति के ब्यौरे संबंधी याचिका हाईकोर्ट में लंबित होने का हवाला देकर सुनवाई अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। इसी बीच हाईकोर्ट ने राज्य सूचना आयोग के डीपी जांगड़ा वाले केस में निर्णय को सही बताते हुए संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक करने के आदेश दे दिए। कपूर ने सभी आईएएस, आईपीएस, एचसीएस, एचपीएस अधिकारियों की संपत्ति का ब्यौरा तत्काल सार्वजनिक करने व इसे विभागों की वेबसाइट पर अपलोड करने की मांग की है।