अखिल भारतीय महिला शक्ति मंच बैनर तले 31 महिलाओं ने पर्दा प्रथा को मानने से इंकार कर दिया। महालक्ष्मी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित इस अभियान के तहत बीड पिपली की महिलाओं ने मंच पर उपस्थित पदाधिकारियों का समर्थन करते हुए पर्दामुक्त समाज बनाने का संकल्प लिया।
इस मौके पर घूंघट खोलने वाली महिलाओं के पति, ससुर, सास व अन्य परिजन भी मौजूद रहे। गांव के सरंपच राजेश सैनी, बिमला देवी पंच, कुसुमलता पंच, सुमनलता ने भी इस पुनीत कार्य में सहयोग देने का आश्वासन दिया।
मौके पर अखिल भारतीय सर्वजात सर्वखाप महापंचायत के महिला विंग की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं यूनिवर्सिटी कॉलेज की शिक्षक डॉ. संतोष दहिया ने कहा कि पर्दा प्रथा भारतीय परंपरा नहीं है। इसे विदेशी आक्रमणों में महिलाओं को बचाने के लिए अपनाया गया था।
अब जब हम आजाद देश में हैं तो एसी प्रथा का कोई औचित्य नहीं रह गया है। समाज से पर्दा प्रथा खत्म करने के लिए यह अभियान चलाया गया है। आधुनिक युग में नारी ने हर क्षेत्र में अपना वर्चस्व कायम किया है। खेल, सेना, प्रशासनिक, राजनीतिक सहित अन्य क्षेत्रों में न केवल महिलाओं ने अपनी शक्ति का लोहा मनवाया। बल्कि एक अलग पहचान भी बनाई है।
इसलिए वर्तमान की नारी को अबला नहीं सबला कहना ही उचित है। ऐसे हालात में घूंघट प्रथा की कोई अवश्यकता नहीं। उन्होंने कहा कि अभियान में बुजुर्गों को साथ लिया जाएगा। यदि साथ न मिला तो फिर उनसे अपील करते हुए इसके प्रति जागरूक भी किया जाएगा।
डॉ. दहिया ने कहा कि ऐसे ही अभियान चलाकर देश से सति प्रथा और बाल विवाह को खत्म किया गया था। उसी प्रकार अब समाज से पर्दा प्रथा समाप्त किया जाएगा।
इस अवसर पर फूल कुमार मलिक, ईश्वर सैनी पंच, मान भवर पाल, कमलेश, बिमला देवी पंच, कुसुमलता पंच, सुमनलता, कांता देवी, पूनम देवी, राधा देवी, मोनिका, रोशनी, कमलेश देवी नीरज देवी उपस्थित रही।