शहर में कई वर्षों से रहने वाले कई लोग चंडीगढ़ में मतदान करना नहीं चाहते हैं। शहर में ऐसे 30 हजार निवासी हैं जिनकी वोट उनके होम टाउन में है और वह वहीं वोट डालते आ रहे हैं।
इसका खुलासा हाल ही में चुनाव विभाग की ओर से इस संबंध में कराए गए सर्वेक्षण से हुआ है। वर्ष 2011 में चंडीगढ़ की जनगणना के हिसाब से शहर में मतदाताओं की संख्या नहीं थी।
चुनाव विभाग ने इसका कारण पता करने के लिए सर्वे कराया और चुनाव विभाग के कर्मचारी घर घर गए। इस सर्वे में जब उन लोगों से चंडीगढ़ में वोट न बनवाने का कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया कि वह अपने होम टाउन में ही वोट डालना चाहते हैं।
इसके अलावा सर्वे में चुनाव विभाग को यह भी पता चला है कि चंडीगढ़ में पहले जिनके वोट थे उनमें से कई लोग जीरकपुर या खरड़ में शिफ्ट हो गए हैं। इस वजह से भी चंडीगढ़ में मतदाताओं की संख्या कम हुई है।
चुनाव विभाग की ओर से मतदाता सूची में संशोधन के लिए 1 अक्तूबर से 30 नवंबर तक विशेष अभियान चलाया गया था।
इस अभियान के बाद एक तरफ जहां चंडीगढ़ की मतदाता सूची में नए मतदाता शामिल हुए हैं, वहीं कुछ के नाम कटे भी हैं। हालांकि जिनके नाम कटे हैं उनकी संख्या एक हजार से कम है। पिछले साल भी शहर में 50 हजार के करीम मतदाता कम हो गए थे। ये मतदाता या तो अपने पुराने निवास से कहीं और शिफ्ट कर गए थे या वे दूसरे शहर में चले गए हैं।
इसके अलावा कुछ का निधन भी हो गया था। इन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने से पहले उन्हें एक बार नोटिस भेजा गया था।
चंडीगढ़ प्रशासन के ज्वाइंट चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर तिलक राज ने कहा कि चंडीगढ़ में मतदाताओं की संख्या शहर की जनगणना के हिसाब से न होना चिंता का विषय था।
इसके कारण जानने के लिए सर्वे कराया तो पता चला कि चंडीगढ़ के कई निवासी अपने होम टाउन में ही वोट डालना चाहते हैं।