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ट्राई सिटी की महिलाओं की चाहत, "हम दो हमारे एक"

Fri, 22 Nov 2013 10:59 PM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
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जनसंख्या नियंत्रण को लेकर लगातार सरकार, एनजीओ व अन्य समाजिक संस्थाएं अभियान चला रही हैं। इसके बावजूद कई महिलाएं एक से ज्यादा बच्चों को तवज्जो दे रही हैं।
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ट्राइसिटी की 30 प्रतिशत महिलाओं को आज भी दो बच्चों की चाह है। यह खुलासा चंडीगढ़ के बेदी अस्पताल व फैमिली प्लानिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर किए गए सर्वे में हुआ है।

आईएमए प्रेसिडेंट व बेदी अस्पताल के संचालक डॉ. जीके बेदी ने बताया कि सेफ मदर सेफ फैमिली मिशन के तहत पिछले दो साल में चंडीगढ़, पंचकूला व मोहाली की महिलाओं को सेहतमंद मां व शिशु के बारे में एजुकेटिव लेक्चर दिए गए।
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इस दौरान उनसे कई सवाल पूछे गए। इनमें 3000 महिलाओं को शामिल किया गया। लगभग 30 फीसदी महिलाएं आज भी एक से ज्यादा बच्चे चाहती हैं, जबकि 70 फीसदी महिलाओं की एक ही शिशु की चाह है।

डॉ. बेदी के मुताबिक, इन महिलाओं को अभी और जागरूक करने की जरूरत है। इसके लिए एसोसिएशन की ओर से अभियान आगे भी जा रहेगा।

60 प्रतिशत महिलाएं करवाने चाहती हैं सीजेरियन डिलेवरी
सर्वे में यह भी चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि 3000 में से 60 प्रतिशत यानी 1800 महिलाएं सीजेरियन डिलेवरी करवाना चाहती हैं, जबकि 30 फीसदी महिलाएं ब्रेस्ट फीड नहीं करवाना चाहती हैं।

डॉ. बेदी के मुताबिक, ये दोनों ही ट्रेंड शहर के लिए काफी खतरनाक है। साथ ही जच्चा व बच्चा के लिए भी अच्छा नहीं है। लेकिन, अब मां व परिजनों को समझाया जाए कि ऐसा करने से वे किसी और को नहीं बल्कि अपने ही शिशु को रोगों को चपेट में व उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम कर रहे हैं।

इसी को ध्यान में रखते हुए बेदी अस्पताल व फैमिली प्लानिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया इंटरनेशनल न्यू बोर्न वीक मना रहे हैं।

इसलिए चले दोनों ट्रेंड
सिजेरियन का प्रमुख कारण देरी से शादी, हाइपरटेंशन, प्रसव के दर्द से बचने के लिए सी सेक्शन यानी सिजेरियन को तवज्जो देना, भविष्यवक्ताओं के प्रभाव तहत सिजेरियन करवाना चाहती है।

इसी तरह ब्रेस्ट फीडिंग के प्रति कम होते रुझान के प्रमुख कारण एंटी नेटल काउंसिलिंग की कमी, राइट फीडिंग प्रैक्टिस की कमी, गर्भवती महिलाओं का आखिरी माह तक काम करते रहना, अवसाद, थकावट व उत्साह की कमी, शिशु के सेहत को लेकर प्लानिंग न करना व जरूरत से ज्यादा गलत जानकारी भी ब्रेस्ट फीडिंग को प्रभावित कर रही है।
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उन्होंने बताया रोजाना ओपीडी में 15-20 शिशु कम भार, बुखार से पीड़ित आ रहे हैं। आज से पांच साल पहले ऐसा नहीं था।
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